1000 रुपए और 500 रुपए के करेंसी नोट अमान्य होने के बाद से देश के कुछ स्थानों पर थोड़ी अफरा-तफरी का माहौल दिखा। हम आपको तीन ऐसी सत्य घटनाएं बताएंगे जो इस कड़वी सच्चाई को बयां करती है।
1000 रुपए और 500 रुपए के करेंसी नोट अमान्य होने के बाद से देश के कुछ स्थानों पर थोड़ी अफरा-तफरी का माहौल दिखा। हम आपको तीन ऐसी सत्य घटनाएं बताएंगे जो इस कड़वी सच्चाई को बयां करती है। इस फैसले का तमाम लोगों ने स्वागत किया तो कुछ बड़े नोट होने के कारण परेशानी में दिखे और एकाएक ऐसा फैसला लेने के विरोध में दिखे। सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखी गईं। जिसमे से एक प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी जिसे पढ़ने के बाद हंसी भी आ रही थी और सोचने पर मजबूर भी होना पड़ रहा था। मीडिया में कार्यरत शांतनु त्रिपाठी ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, 'ये दिन कभी नहीं भूलूंगा। आज 800 में 1000 की नोट बेंचनी पड़ी। # अच्छे दिन।''
हड़बड़ी में आ गए लोग
दरअसर देश में जैसे ही इस फैसले की घोषणा हुई पहले लोग हड़बड़ी में आ गए। फिर 9 नवंबर को पूरे दिन बैंक और एटीएम बंद रहे। ऐसे में कुछ धूर्त किस्म के लोगों ने आम जनता की मजबूरी का फायदा उठाया और 1000 और 500 रुपए के नोट के रेट फिक्स कर दिए। दिल्ली से लेकर लखनऊ और पटना से लेकर जयपुर तक ऐसे तमाम घटनाक्रम एक ही दिन में सामने आए जब लोगों ने अपने हजार रुपए के नोट को 600-700 रुपए में बेच दिया हो।
'800 में 1000 रुपए की नोट बेंचनी पड़ी, ये दिन कभी नहीं भूलूंगा'
शांतनु त्रिपाठी को भोपाल से दिल्ली जाना था, लेकिन रेलवे स्टेशन पर कोई भी रेलवे कर्मचारी या फिर टिकट खिड़की पर मौजूद कर्मचारी 500 और 1000 रुपए के नोट स्वीकार नहीं कर रहे थे। वहीं बाजार में भी कोई 500 और 1000 रुपए का नोट लेने के लिए राजी नहीं हो रहा था। ऐसे में शांतनु को मजबूरन अपना 1000 रुपए का नोट 800 रुपए में बेचना पड़ा। कई लोगों ने शांतनु से कहा कि वह ऐसे लोगों की पहचान जाहिर करे ताकि करेंसी की ब्लैकमार्केटिंग करने वालों को लोग पहचान सकें। लेकिन शांतनु ने ऐसा करने से मना कर दिया, उसने अपनी तरफ से दलील दी कि, ऐसे गाढ़े वक्त में जिसने मेरी मदद की मैं उसे क्यों किसी बात का दोषी बनाऊं।
अस्पताल वाले नोट लेने से मना कर रहे हैं, क्या करुं
वहीं एक अन्य घटनाक्रम में मेरे पास दिल्ली से मेरी एक मित्र भारती का फोन आता है और वह मुझसे कहती है कि यहां अस्पताल में हम आए हुए हैं, लेकिन अस्पताल और डॉक्टर 1000 और 500 रुपए के नोट में पैसे लेने से मना कर रहे हैं। ये हालत दिल्ली की थी जो भारत का दूसरा सबसे अमीर शहर है और जहां साक्षरता 90 फीसदी से अधिक है। किसी तरह वहां पर पुलिस और लोगों के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रशासन ने पैसे लिए और इलाज शुरू किया।
ट्रेन में नहीं लिए जा रहे हैं 1000-500 के नोट
तीसरी घटना पटना की है, जहां से मेरे पास एक फोन कॉल आता है। पटना में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हीरेश पांडेय ने बताया कि उनके पिता जी ट्रेन से वेल्लूर जा रहे हैं और उनके पास 1000 और 500 रुपए के नोट ही हैं, फुटकर पैसे या फिर 100 रुपए की करेंसी बहुत कम है। ऐसे में यात्रा में कई तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
घोषणा के प्रमुख बिंदु
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि, अस्पताल, श्मशान घर, ट्रेन और बस में लोगों को परेशानी ना हो इसलिए 11 नवंबर की रात 12 बजे तक 1000 और 500 रुपए के नोट स्वीकार किए जाएंगे। इसके तमाम स्थानों पर 1000 और 500 रुपए के नोट नहीं स्वीकार किए जा रहे हैं।
क्या सकारात्मक सोच दिखाने में पीछे रह गए हम
अब सवाल ये उठता है कि जब सरकार ने नोट बंद करने की घोषणा की तो उसे लोगों ने तत्काल स्वीकर कर लिया। 8 बजे घोषणा हुई और सवा आठ बजे से लोगों ने 500 रुपए के नोट लेने बंद कर दिए। जबकि उस नोट की वैधता रात 12 बजे तक थी और कुथ स्थानों और विशेष परिस्थितियों में 11 नवंबर 2016 की रात 12 बजे तक है। वहीं ये नोट 30 दिसंबर तक किसी भी बैंक या फिर डाक घर में बदले जा सकते हैं या फिर जमा किए जा सकते हैं। इतनी सहूलियत के बाद भी लोगों ने धैर्य नहीं दिखाया। यहां पर जनता के आपसी समझ का उदाहरण दिया जाना चाहिए था, लेकिन हम उसमे पीछे रह गए।


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