दुनिया में बहुत कम ही लोग होते हैं जो अपने जीवन के अंतिम समय तक शीर्ष पर बने रहते हैं, इसके पीछे उनकी एकाग्रता, प्रतिबद्धता और जूनून एक बड़ा कारण होते हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण है भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह का 98 साल की उम्र में उनका निधन हो गया है। दिल्ली के वायुसेना रेफरल अस्पताल में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। ये भी वक्त का संयोग है कि जब उनके प्राणों ने उनका शरीर छोड़ा तो उस वक्त घड़ी में 19.74 मिनट हो रहे थे। यानि कि शाम के 7.47 का वक्त। सेना में समय को एएम, पीएम के बजाय 24 घंटे के फॉर्मेट में बिना डॉट के संबोधित किया जाता है। भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह को फाइव स्टार रैंक मिली थी जो कि सर्वोच्च रैंक है। इससे पहले फील्ड मार्शल सैम मानेक शॉ और जनरल के एम करियप्पा को ही फाइव स्टार रैंक मिली थी।
खास बात ये है कि फाइव स्टार रैंक के अधिकारी कभी रिटायर नहीं होते हैं और जहां कहीं भी जाते हैं तो अपनी वर्दी में ही जाते हैं। भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह का व्यक्तिव्य हर किसी के लिए एक उदाहरण है, जिससे प्रेरणा लेकर हम भी शीर्ष बने रहने का विश्वास हासिल कर सकते हैं।
जन्म
भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह का जन्म पंजाब के लयालपुर में 15 अप्रैल 1919 को हुआ था ये स्थान अब पाकिस्तान में है। इस स्थान को अब फैसलाबाद के नाम से जाना जाता है। अर्जन सिंह भारतीय वायुसेना के एकमात्र फाइव स्टार रैंक ऑफिसर थे।
शिक्षा
भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह की शुरुआती शिक्षा पाकिस्तान में ही हुई थी उस दौरान पाकिस्तान भारत का ही अंग था और भारत में अंग्रेजों का शासन था। उन्होंने अपनी शिक्षा पाकिस्तान के मोंटगोमरी में पूरी की।
भारतीय वायुसेना में चयन
भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह को महज 19 वर्ष की उम्र में वायुसेना में पायलट ट्रेनिंग के कोर्स के लिए चुन लिया गया था। भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह ने जब एयर फोर्स ज्वाइन किया था तब उसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से बुलाया जाता था। अर्जन सिंह बड़ी ही तेजी से आगे बढ़ते गए। 1938 में एयरफोर्स कंपटीशन में पास हो जाने के बाद उन्हें एयरफोर्स की ओर से ट्रेनिंग के लिए रॉयल कॉलेज इंग्लैंड भेजा गया।
डिटिंग्विश फ्लाइंग क्रॉस से सम्मानित
दूसरे विश्वयुद्ध में जापान के खिलाफ इंफाल में भेजे गई एयरफोर्स स्क्वाड्रन ने लड़ाई के लिए उन्हें और 8 अन्य लोगों को डिटिंग्विश फ्लाइंग क्रॉस से सम्मानित किया गया। 23 दिसंबर 1939 को उन्हें एक पायलट अधिकारी के रुप में रॉयल एयरफोर्स में कमीशन मिला।
तेजी से बढ़े आगे
1 मई 1941 को अर्जन सिंह फ्लाइंग ऑफीसर बनें, इसके बाद 15 मई 1942 वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनें। 1944 में अर्जन सिंह स्क्वाड्रन लीडर बने, इसी दौरान उन्हें फ्लाइंग क्रॉस से भी सम्मानित किया गया। 1947 में वह भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर बने, इसके बाद 1984 में वह ग्रुप कैप्टन बनें। 1949 में अर्जन सिंह एयर कोमोडोर के पद पर पदोन्नत हुए। 2 जनवरी 1955 को वह एयर कोमोडोर पश्चिमी वायु कमान दिल्ली में एयर कोमोडोर के पद पर आसीन हुए। 1 अगस्त 1966 में अर्जन सिंह भारतीय वायुसेना के अध्यक्ष बने और 15 जुलाई 1969 में वह वायुसेना से रिटायर हो गए। इसके बाद 26 जनवरी 2002 में अर्जन सिंह को भारतीय वायुसेना का मार्शल बनाया गया।
44 वर्ष की उम्र में बने वायु सेनाध्यक्ष
अर्जन सिंह महज 44 वर्ष की उम्र में भारतीय वायुसेना के अध्यक्ष बनें। 15 अगस्त 1947 के दिन अर्जन सिंह ने 100 अधिक विमानों के साथ लाल किले के उपर से फ्लाई पास्ट का नेतृत्व किया था।
नागरिक पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित
भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह को पाकिस्तान के खिलाफ जंग में उनकी भूमिका के लिए नागरिक पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित भी किया गया था। इसी जंग के बाद उनकी रैंक बढ़ाकर एयर चीफ मार्शल किया गया था।
भारतीय वायुसेना की बढ़ाई ताकत
अपने सेवाकाल में अर्जन सिंह ने 60 अलग-अलग तरह के विमान उड़ाए थे। 1969 में सेवानिवृत्ति के वक्त भी उड़ान भरने का उनका जोश खत्म नहीं हुआ था। जब वह चीफ ऑफ एयर स्टाफ थे उस वक्त IAF में सुपरसॉनिक फाइटर्स, टैक्टिकल ट्रांसपॉर्ट एयरक्राफ्ट और असॉल्ट हेलिकॉप्टर्स को शामिल किया था।
नाम पर एयरफोर्स स्टेशन
14 अप्रैल 2016 को अर्जन सिंह के 97 वें जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए तत्कालीन चीफ ऑफ एअर स्टाफ एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने घोषणा की थी कि पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में भारतीय वायु सेना का नाम अर्जन सिंह के नाम पर होगा, उनकी सेवा के सम्मान में अब ये वायु सेना स्टेशन अर्जन सिंह स्टेशन कहलाएगा।
कर्तव्यनिष्ठ
भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह की कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें जानने और देखने के बाद हमारा सीना गर्व से फूल जाता है, कर्तव्यनिष्ठ सैनिक का जीवन कैसा होता है वह उन्होंने हर कदम पर दिखाया है। ऐसा ही एक क्षण था जब भारत के मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर वह रामेश्वरम पहुंचे। उस दौरान उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, उम्र 97 साल हो चुकी थी और उनके पैर शरीर का भार बड़ी ही मुश्किल से सम्हाल पा रहे थे। इस बावजूद वह अपनी कुर्सी से उठकर एपीजे अब्दुल कलाम के पार्थिव शरीर के पास पहुंचे और उन्हें आखिरी श्रद्धांजलि देकर सैल्यूट किया। ये वो क्षण था जिसे देखने के बाद गर भारतीय की आंखों में गर्व के आंसू थे। अर्जन सिंह अपने पीछे ऐसी ही विरासत छोड़ गए हैं जिसका अनुसरण करके हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। वह एक नायक की तरह जीए और एक महानायक की तरह चिर अनंत में विचरण करने चले गए। उनकी कहानियां उनके संदेश हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे और हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।
More From GoodReturns

Gold Rate Today: 30 मार्च को सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Gold Rate Today: 1 अप्रैल को सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 2 अप्रैल को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 31 मार्च को चांदी की कीमतों में आई गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Gold Rate Today: 2 अप्रैल को भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 30 मार्च को चांदी का भाव सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 1 अप्रैल को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: महीने के आखिरी दिन 31 मार्च को सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव! जानिए 24k, 22k गोल्ड रेट

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: साझा विरासत के साथ आगे बढ़ रहे मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश, निवेश और विकास पर बनी सहमति

LPG Cylinder Price Hike: युद्ध के बीच बड़ा झटका! आज से एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹218 तक बढ़े

Bank holiday Today: महावीर जयंती पर आज बैंक खुला रहेगा या बंद? जाने से पहले चेक करें RBI हॉलिडे लिस्ट



Click it and Unblock the Notifications