नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई अच्छी तरह जानता है कि भारतीय बैंक कठिन फैसले लेते वक्त पीछे हट जाते हैं। ऐसे में कोरोना वायरस का प्रभाव खत्म होने के बाद बैंकों की भूमिका बढ़ानी होगी। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है। इसीलिए आज कई सालों के बाद आरबीआई ने केवल रिवर्स रेपो को घटाया है। सुनने में यह फैसला काफी छोटा लग सकता है, लेकिन इसका बैंकों पर बड़ा असर पड़ेगा। दरअसल अब बैंक अपना पैसा आरबीआई के पास रख कर ज्यादा फायदा नहीं उठा पाएंगे। ऐसे में बैंकों के समक्ष कर्ज बांट कर मुनाफा कमाने की मजबूरी होगी। अगर बैंक ऐसा नहीं करेंगे तो उनको जमाकर्ताओं की एफडी का ब्याज चुकाना भारी पड़ जाएगा। आरबीआई के रिवर्स रेपो को घटाने और रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला बैंकों को साफ साफ संकेत हैं कि वह कर्ज बांटने में कोताही न करें। यह घोषणा आज आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की है।
क्या होता है रिवर्स रेपो रेट
देश में कामकाज कर रहे बैंकों के पास जब दिन-भर के कामकाज के बाद रकम बची रह जाती है, तो उस रकम को भारतीय रिजर्व बैंक में रख देते हैं। इस रकम पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। भारतीय रिजर्व बैंक इस रकम पर जिस दर से बैंकों को ब्याज देता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। लेकिन अगर अब बैंक रिवर्स रेपो घटने के बाद अपना पैसा आरबीआई के पास रखना चाहेंगे, तो उन्हें कम ब्याज मिलेगा। ऐसे में बैंकों को लोन बांट कर ज्यादा ब्याज कमाना होगा।
कितना घटाया गया है रिवर्स रेपो
आरबीआई ने आज रिवर्स रेपो रेट 0.25 फीसद घटाकर 3.75 फीसदी करने का भी ऐलान किया। यह रिवर्स रेपो रेट पहले 4 फीसदी था। रिवर्स रेपो रेट की नई दरें आज से ही लागू भी कर दी गई हैं। वहीं दूसरी तरफ रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकारी बैंकों को बढ़ाना होगा कर्ज
सरकारी बैंक आमतौर पर कर्ज बांटने में डरते हैं। इन बैंकों को अपने लोन एनपीए होने या डूबने का डर रहता है। ऐसे में यह बैंक कोशिश करते हैं कि वह ज्यादा कर्ज न बांटे और बचा पैसा आरबीआई के पास जमा करके ब्याज कमा लें। लेकिन आरबीआई ने अब रिवर्स रेपो को और घटा दिया है। ऐसे में अगर बैकों ने कर्ज नहीं बांटा और पैसा आरबीआई के पास ही रखा तो उन्हें घाटा होगा। क्योंकि अब उनको केवल 3.75 फीसदी ही ब्याज मिलेगा। वहीं बैंकों को सेविंग खातों में भी भी करीब औसतन 3 फीसदी से ज्यादा ब्याज देना पड़ता है। ऐसे में बैंक को अगर 3.75 फीसदी ब्याज आरबीआई से मिलेगा तो वह अपनी कॉस्ट ऑफ फंडिंग भी नहीं निकाल पाएगा। क्योंकि बैंकों को अपने कर्मचारियों सहित अन्य खर्च को भी जोड़ना पड़ताा है। ऐसे में अगर उसे ग्राहकों के सेविंग खाते और एफडी में जमा के औसत से ज्यादा ब्याज नहीं कमाया तो बैंक घाटे में चला जाएगा। इससे बचने का एक ही रास्ता है कि बैंक ज्यादा से ज्यादा कर्ज बांट। यही आरबीआई और सरकार भी चाहती है, क्योंकि कोरोना वायरस के बाद कारोबार चलाने के लिए पैसों की सभी को जरूरत होगी। यह जरूरत बैंक ही पूरी कर सकते हैं।
More From GoodReturns

Gold Rate Today: 1 अप्रैल को सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 2 अप्रैल को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 31 मार्च को चांदी की कीमतों में आई गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Gold Rate Today: 2 अप्रैल को भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 1 अप्रैल को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: महीने के आखिरी दिन 31 मार्च को सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव! जानिए 24k, 22k गोल्ड रेट

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: साझा विरासत के साथ आगे बढ़ रहे मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश, निवेश और विकास पर बनी सहमति

LPG Cylinder Price Hike: युद्ध के बीच बड़ा झटका! आज से एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹218 तक बढ़े

Bank holiday Today: महावीर जयंती पर आज बैंक खुला रहेगा या बंद? जाने से पहले चेक करें RBI हॉलिडे लिस्ट

आज का Financial Raashifal: 02 अप्रैल, 2026 - सूक्ष्म बाज़ार संकेतों से व्यावहारिक अवसर खोजें।

आज का Financial Raashifal: 01 अप्रैल, 2026 - व्यावहारिक कदमों से बाज़ार के संकेतों को समझें



Click it and Unblock the Notifications