EVM Machine Kisne Banaya: चुनावी माहौल के बीच कई लोग ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। ईवीएम (EVM) यानि कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जिसकी मदद से एक व्यक्ति केवल एक ही वोट डाल सकता है। अगर आपके मन में भी यह सवाल आता है कि आखिर ईवीएफ मशीन किसने बनाई औऱ इसकी क्या कीमत होगी तो चलिए इसके बारे में आपको बताते हैं।
किसने बनाई ईवीएम?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईवीएम का प्रस्ताव साल 1977 में आया था और तब ईवीएम के निर्माण का काम इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ECIL) के हाथ में था। साल 1979 में, एक कार्यशील मॉडल विकसित किया गया और 6 अगस्त 1980 को विभिन्न राजनीतिक दलों के सामने इसे पेश किया गया था।

इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को ईवीएम बनाने का श्रेय जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और इससे जुड़े अन्य उपकरणों का निर्माण इन्हीं के द्वारा होता है।
ईवीएम मशीन के आने से हमारे देश में वोटिंग प्रक्रिया तेज और बेहद आसान भी हो गई। अब आप सोच रहे होंगे कि इस ईवीएम से पहले ऐसा क्या होता था जिसके कारण चुनाव के रिजल्ट देरी से आते हैं। तो आपको बता दें कि पहले मतपत्रों की गिनती होती थी जिसमें कई दिन लग जाते हैं और इस कारण से ही रिजल्ट देर से आते थे।
वहीं, ईवीएम मशीन की मदद से अब कुछ ही घंटों में इलेक्शन के रिजल्ट आ जाते हैं। सिर्फ यहीं नहीं, पहले केवल एक ही वोटर को 2 से 3 मिनट तक लग जाते थे वहीं, ईवीएम की मदद से केवल कुछ ही मिनटों में कई सारे लोग वोट डाल सकते हैं।
कब शुरू हुआ था ईवीएम का इस्तेमाल?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईवीएम का उपयोग वोट करने और मतों की गिनती में होता है। सबसे पहले भारत में ईवीएम का का इस्तेमाल साल 1982 में केरल के नॉर्थ परावूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 1989 में हुआ था।
केरल के बाद मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल पहले परीक्षण के रूप में किया गया था। साल 1999 में पहली बार पूरे राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान गोवा में इसका इस्तेमाल हुआ था। साल 2003 में देश भर में जहां भी उपचुनाव हुए, उस दौरान इसी मशीन का इस्तेमाल किया गया था। वहीं, साल 2004 के लोकसभा चुनाव में देश भर में ईवीएम मशीन के जरिए ही चुनाव हुए।
आखिर क्या है ईवीएम मशीन की कीमत?
आपको बता दें कि 1989-90 के दौरान जब पहली बार ईवीएम मशीन खरीदी गई थी तो उसकी कीमत 5,500 रुपए पड़ी थी। जब साल 2014 में इसका ऑर्डर दिया गया था तो एक मशीन की कीमत 10,500 रुपए पड़ी थी। वहीं, साल 2019 में इसका मूल्य 47,000 रुपए के करीब था। साल 2019 के मूल्य स्तर पर 14,000 रुपए था और इसमें एक कंट्रोल यूनिट, 1 बैलटिंग यूनिट और बैटरी की कीमत भी शामिल है।
इन देशों में भी भारतीय ईवीएम से होती है वोटिंग
आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भूटान, केन्या, नामीबिया, नेपाल में भी भारतीय ईवीएम से भी वोटिंग होती है।
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