नई दिल्ली, नवंबर 10। इस कॉम्पिटीशन भरी दुनिया में एक नया बिजनेस शुरू करने और उसे ग्रोथ के रास्ते पर ले जाने के लिए फंडिंग बेहद जरूरी है। यह फंडिंग प्रमोटरों द्वारा अपनी बचत का उपयोग करके या किसी वित्तीय संस्थान से लोन लेकर हासिल की जा सकती है। ये वित्तीय संस्थान कोई फाइनेंस कंपनी या बैंक हो सकता है। ऐसे लोन्स को बिजनेस लोन कहा जाता है। एक बिजनेस लोन अपने आप में सिक्योर्ड या अनसिक्योर्ड दोनों में से कुछ भी हो सकता है। यदि यह लोन बैंक के पास कोई चीज गिरवी रखे बिना प्राप्त किया जाता है तो लोन को अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन कहा जाता है। गिरवी रख कर प्राप्त किए गए लोन को सिक्योर्ड माना जाता है। बिजनेस लोन आप कैसे भी लें, कुछ चीजों पर ध्यान देना जरूरी है।
लोन अवधि, ब्याज दर की तुलना करें
बिजनेस लोन लेने के मामले में जानकार कहते हैं कि जो लोग बिजनेस लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें ऐसे बैंक या कंपनी का विकल्प चुनना चाहिए जो उन्हें संभव न्यूनतम ब्याज दर पर जरूर लोन राशि प्रदान करे। साथ ही लोन की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो उधारकर्ता की चुकौती क्षमता के अनुकूल हो। यानी आप आराम से लोन चुका पाएं। दूसरे बिजनेस लोन का प्रकार, जैसे ओवरड्राफ्ट या नकद लोन सुविधा, उस बिजनेस के कैश फ्लो से मेल खाना चाहिए जिसे आप शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
लेंडर (लोन देने वाला बैंक या कंपनी) की रेप्यूटेशन को चेक करें
किसी लेंडर के साथ लोन समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले, चाहे वह बैंक हो या एनबीएफसी, आपको उसकी सेवाओं और इंफ्रा के मामले में उसकी रेप्यूटेशन की जांच करनी चाहिए। यह काम ऑनलाइन रिसर्च और मौजूदा ग्राहकों के रेस्पोंस पढ़ने से किया जा सकता है। हालांकि ये रिव्यू सटीक हो भी सकते हैं और नहीं भी। लेकिन ये निश्चित रूप से आपके विकल्पों का मूल्यांकन करने में मदद करेंगे।
ऐप्लिकेशन प्रोसेस और लोन टर्नअराउंड टाइम
अधिकांश लेंडर के पास बिजनेस लोन आवेदन को प्रोसेस करने के लिए दस्तावेजों के एक ही सेट की आवश्यकता होती है, लेकिन ऐसे बैंक भी हैं जिनके पास लोन आवेदन प्रोसेस डिजिटलीकरण के कारण तेजी और आसानी से पूरी हो सकती है। इसलिए किसी लेंडर का चयन करने से पहले लोन आवेदन प्रोसेस की चेक कर लें। ताकि आपका समय बचे और लोन जल्दी मिले।
कमर्शियल चार्जेस
ब्याज दर के अलावा आपको अन्य चार्जेस की भी तुलना करनी चाहिए। जैसे कि प्रोसेस शुल्क, या यदि आप ईएमआई से चूक जाते हैं तो अतिरिक्त शुल्क आदि। ये चार्जेस आपके लोन को भी प्रभावित कर सकते हैं। यह चार्जेस आपके लिए एक अतिरिक्त लागत बन जाते है।
बैंक देगा इन बातों पर ध्यान
एक लेंडर आपको लोन देते समय बिजनेस का नेचर, आवेदक का क्रेडिट स्कोर, टर्नओवर, जैसे फैक्टर पर विचार कर सकता है। जानकारों का कहना है कि यदि आप ऐसा बिजनेस प्लान पेश करते हैं, जिसमें कमाई की अधिक उम्मीद हो तो बिजनेस लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यहां एक और बात बता दें कि ग्राहक की अपेक्षाओं के अनुसार इन सभी फैक्टरों में फिट बैठने वाले लेंडर खोजना मुश्किल है। लेकिन आपको एक ऐसा लेंडर चुनने की ज़रूरत है जो यहां बताए गए अधिकतर मांगे पूरी करता हो।
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