नई दिल्ली, अगस्त 02। डिजिटल भुगतान ने खरीदारी और दूसरों को पैसा भेजना आसान बना दिया है। एक बटन के क्लिक पर पैसे ट्रांसफर और प्राप्त किए जा सकते हैं। हालांकि इस आसानी के साथ गलत भुगतान करने का डर भी लगा रहता है। भारत में डिजिटल भुगतान पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2020 में लगभग 79 प्रतिशत परिवारों ने पेटीएम और फोनपे जैसे किसी न किसी रूप में थर्ड पार्टी के डिजिटल भुगतान ऐप का इस्तेमाल किया। इस बीच, 52 फीसदी परिवार केंद्रीय बैंक आरबीआई सपोर्ट वाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन भुगतान सिस्टम का उपयोग करने वाले इतने सारे लोगों में गलत क्रेडिट करने से खुद को बचाने के लिए कौन से सुरक्षा उपाय हैं? जानते हैं इस बारे में विस्तार से और ये भी कि यदि आपने गलत अकाउंट में पैसे भेज दिए तो आप उन्हें कैसे वापस पा सकते हैं।
हाल में घटी में एक घटना
29 जून 2022 को मुंबई की वाली एक महिला ने 7 लाख रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर गलत खाते में कर दिया। जब उसने मदद के लिए अपने बैंक से संपर्क किया, तो उनकी ओर से महिला की गलती बताते हुए उसकी बात नहीं सुनी गयी। इसके बाद महिला ने साइबर सेल से संपर्क किया, जिसने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए कि उसे उसका पैसा वापस मिल जाए। 2 जुलाई 2022 को पैसा रिफंड कर दिया गया।
आपको करना चाहिए
- भुगतान वापस पाने के लिए तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें
- अपने बैंक प्रबंधक या रिलेशनशिप मैनेजर को यह कॉल करें और लेन-देन की सारी डिटेल (राशि, समय और लाभार्थी और भुगतान करने वाले व्यक्ति दोनों के खाते की डिटेल) अपने पास रखें
- टेलीफोन पर शिकायत करने के साथ-साथ, आपको निकटतम शाखा में जाना होगा और घटना की डिटेल देते हुए एक आवेदन जमा करना होगा
इस कंडीशन में होगी आसानी
यदि गलत लाभार्थी उसी बैंक में खाताधारक है जिसमें आपका खाता है, तो प्रोसेस आसान हो जाती है। वरना आपका बैंक गलत लाभार्थी के बैंक से संपर्क करेगा और रिवर्सल शुरू करेगा। जैसे ही गलत खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाता है, तो तुरंत ही शिकायत दर्ज करना महत्वपूर्ण है।
सिविल प्रोसीजर को़ड
यदि सब कुछ ठीक रहा, तो गलत प्राप्तकर्ता को पैसा वापस कर देना चाहिए। हालांकि, ऐसा भी हो सकता है कि वे पैसा लौटाने से मना कर सकता है। ऐसे में नागरिक प्रक्रिया संहिता या सिविल प्रोसीजर को़ड के तहत पैसे की वसूली के लिए सिविल मुकदमा दायर करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
कितना मिलता है समय
पैसे की वसूली के लिए मुकदमा दायर करने की समय अवधि कार्रवाई का कारण जनरेट होने की तारीख से तीन वर्ष है। ये उस मामले में है जब पैसे को गलत अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है। डिजिटल लेनदेन के लिए लोकपाल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी है। वर्तमान में डिजिटल लेनदेन के लिए 21 लोकपाल नियुक्त हैं, जिनके कार्यालय ज्यादातर राज्यों की राजधानियों में स्थित हैं। एक सादे कागज पर लिखकर और डाक / फैक्स / हैंड डिलीवरी द्वारा लोकपाल के संबंधित कार्यालय को भेजकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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