Real Estate Companies: ग्राहकों को अट्रैक्ट करने के लिए रियल एस्टेट कंपनी अलग-अलग स्ट्रैटजी अपनाती हैं, लेकिन जब ग्राहक उनके फ्लैट को खरीद लेते हैं तो कंपनी अपने वादों को पूरा नहीं करती है। ऐसे में ग्राहकों को काफी परेशानी होती है।
सरकार ने घर खरीदारों के हित में रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट, 2016 बनाया था। इसे 1 मई, 2016 से लागू कर दिया गया था। अगर आपने भी कोई फ्लैट देखा है और कंपनी बाद में आपके साथ आनाकानी कर रही है तो आपक पास 3 ऑप्शन है जिनकी मदद से आप इसकी शिकायत कर सकते हैं।

RERA में की जा सकती है शिकायत
सरकार ने घर खरीदारों के हित में रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट साल 2016 बनाया था। रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ किसी तरह की शिकायत उस राज्य के RERA में की जा सकती है, जहां प्रोजेक्ट स्थित है। सरकार ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी को कई अधिकार दिए हैं। वह शिकायत सही पाए जाने पर रियल एस्टेट कंपनी को मुआवजे का भुगतान करने को कह सकती है। वह प्रोजेक्ट जल्द पूरा करने के लिए रियल एस्टेट कंपनी पर दबाव बना सकती है।
शिकायत दर्ज करने के लिए, आपको कुछ स्टेप्स को फॉलो करना होगा-
- यूपी रेरा वेबसाइट पर लॉग इन करें। इसके बाद यूपी रेरा शिकायत दर्ज करने के लिए होमपेज पर जाएं।
- शीर्ष मेनू बार से शिकायत पर क्लिक करें। शिकायत दर्ज करें पर इस ऑप्शन पर क्लिक करें।
- ईमेल पते या ओटीपी का उपयोग करके साइन अप करें। यदि घर खरीदने वाले नए उपयोगकर्ता हैं, तो नाम, पता, पासवर्ड जैसे जानकारी दर्ज करें।
- जब घर खरीदार साइन इन करता है, तो विवरण दर्ज करें जैसे व्यक्तिगत जानकारी, शिकायत का प्रकार, आदि भरें। इस शिकायत को दर्ज करने के लिए घर खरीदारों को 1,000 रुपये का शुल्क देना होगा।
- ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें, और फिर प्राधिकरण एक शिकायत संख्या उत्पन्न करेगा जिसका उपयोग बाद में शिकायत की स्थिति को ट्रैक करने के लिए किया जाएगा।
कंज्यूमर कोर्ट का लीजिए सहारा
घर खरीदार को ग्राहक कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 के तहत भी शिकायत करनी चाहिए। एक्ट के अनुसार, ग्राहक माना गया है। ग्राहक नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ शिकायत कर सकता है। यह अर्द्ध-न्यायिक फोरम है। हर राज्य में यह फोरम होता है।
अगर प्रॉपर्टी की वैल्यू 20 लाख रुपये तक है तो डिस्ट्रिक्ट फोरम में शिकायत की जा सकती है। 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की प्रॉपर्टी की शिकायत राज्य कमीशन में की जा सकती है। 1 करोड़ से ज्यादा कीमत की प्रॉपर्टी की शिकायत नेशनल कमीशन में करनी होगी।
NCLT में शिकायत करें
रियल एस्टेट कंपनी के प्रोजेक्ट समय पर नहीं पूरा करने पर उसके खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए कम से कम 100 फ्लैट खरीदारों या प्रोजेक्ट के कम से कम 10 फीसदी ग्राहकों का एक साथ आना जरूरी है।
इसके लिए डिफॉल्ट का टोटल अमाउंट 1 करोड़ रुपये से ज्यादा होना चाहिए। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 में घर खरीदार को फाइनेंशियल क्रेडिटर माना गया है। इस कोड के तहत आप NCLT में शिकायत कर सकते हैं।
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