Differences Between NEFT And UPI: आज कल ज्यादातर लोग पेमेंट के लिए यूपीआई या फिर एनईएफटी की मदद लेते हैं। बेहद आसानी से कुछ ही मिनटों में पैसे इन दोनों के माध्यम से ट्रांसफर हो जाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये दोनों मोड एक दूसरे से अलग होते हैं। आइए इसके अंतर के बारे में आपको 5 प्वाइंट्स में बताते हैं।

कब हुई थी यूपीआई और एनईएफटी की शुरुआत?
यूपीआई( Unified Payments Interface) का इस्तेमाल कई सारे कामों के लिए किया जाता है। आप मोबाइल रिचार्ज से लेकर शॉपिंग बिल तक की पेमेंट करने के लिए इसका यूज करते होंगे। यूपीआई को साल 2016 में नेसनल पेमेंट कॉर्प ऑफ इंडिया ने लॉन्च किया था। यूपीआई एक तरह का मोबाइल ऐप है जिसके सिस्टम से आप कई बैंक अकाउंट को लिंक कर सकते हैं। यूपीआई सर्विस 24 घंटे उपलब्ध होती है। इसका मतलब है कि यूजर्स कभी-भी, कहीं-भी बड़ी आसानी से यूपीआई पेमेंट कर सकते हैं।
वहीं, एनईएफटी(National Electronic Funds Transfer) के बारे में आपको बताएं तो इसकी शुरुआत नवंबर 2005 में भारतीय रिजर्व बैंक ने की थी। यह भी एक तरह का पेमेंट सिस्टम है जो पूरे राष्ट्र में लागू हुआ है। इसे भी जल्द से जल्द पेमेंट करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। एनईएफटी के जरिये आप आसानी से एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। यह सर्विस वर्किंग डे के दिन ही काम आती है। एनईएफटी सर्विस में मिनिमम और मैक्सिमम अमाउंट के लिए कोई लिमिट नहीं होती है।
दोनों में इस तरह दी जाती है सुरक्षा
NEFT में पैसे खो जाने या फिर फ्रॉड होने का खतरा बेहद कम होता है। अगर NEFT के जरिये फंड ट्रांसफर होता है तब मैसेज या मेल के जरिये कंफर्मेशन मिल जाता है। यह फाइनेंस पर कंट्रोल करने और जल्द से जल्द फंड ट्रांसफर करने का सही तरीका है। वहीं, यूपीआई की मदद से जब आप पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं तो यूपीआई ऐप्स में धोखाधड़ी को रोकने के लिए 2-factor authentication होता है। यूपीआई आईडी की मदद से आप आसानी से किसी भी बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। यूपीआई से ट्रांजैक्शन के लिए आपको पर्सनल डिटेल्स देने की जरूरत नहीं होती है।
लेन-देन की लिमिट
RBI ने NEFT के माध्यम से आपके द्वारा भेजी जा सकने वाली राशि पर कोई सीमा नहीं लगाई है। हालांकि, बैंक अधिकतम लेनदेन राशि की सीमा निर्धारित कर सकते हैं। UPI लेनदेन के लिए, भुगतान लिमिट के आधार पर अलग-अलग होती है। नियमित भुगतानों के लिए, अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये तक है। Foreign inward remittances, बीमा, कैपिटल मार्केट आदि जैसी कैटेगरी में 2 लाख रुपये की ऊपरी सीमा है। इसके अतिरिक्त आप रिटेल डायरेक्ट स्कीम और IPO आवेदनों के लिए UPI भुगतान के साथ 5 लाख रुपये तक का ट्रांसफर कर सकते हैं।
दोनों के अलग-अलग फायदे
यूपीआई के लिए एक बार सेट-अप की आवश्यकता होती है, जो आपको कुछ ही क्लिक में कई भुगतान करने में सक्षम बनाता है। यूपीआई की पैसे ट्रांसफर करने के प्रोसेस में बायोमेट्रिक्स, यूपीआई पिन, वन-टाइम पासवर्ड आदि के साथ सुरक्षा सुनिश्चित होती है। वहीं, एनईएफटी में बहुत अधिक कागजी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होती है, भले ही आप बैंक शाखा के माध्यम से लेनदेन करते हों। आरबीआई सीधे एनईएफटी का प्रबंधन करता है, इसलिए आपके लेनदेन की प्रक्रिया में सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
ये है पैसे ट्रांसफर करने की लिमिट
यूपीआई की अधिकतम दैनिक ट्रांसफर सीमा बैंक दर बैंक 25,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये के बीच हो सकती है। एनईएफटी का उपयोग करके हस्तांतरित की जाने वाली न्यूनतम या अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है। नकद आधारित धन प्रेषण के लिए प्रति लेनदेन 50,000 रुपये की ऊपरी सीमा लागू है। इसमें ग्राहकों को पता, टेलीफोन नंबर आदि सहित पूरी जानकारी देनी होगी।
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