नई दिल्ली, नवंबर 17। आपने अकसर पेनी स्टॉक्स के बारे में सुना होगा। ये शेयर तगड़ा रिटर्न दे सकते हैं और मध्यम या लंबी अवधि में मल्टीबैगर साबित हो सकते हैं। पर पेनी स्टॉक्स होते क्या हैं? अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं या करने की योजना बना रहे हैं तो आपको इसके बारे में पता होना चाहिए। बता दें कि पेनी स्टॉक्स में तगड़ा रिटर्न देने की क्षमता तो होती है, मगर इनमें जोखिम भी होता है। यहां हम जानेंगे कि किन शेयरों को पेनी स्टॉक्स कहा जाता है और इनमें जोखिम क्यों होता है।
बेहद कम दाम वाले शेयर
वैसे तो पेनी स्टॉक्स की कोई स्टैंडर्ड परिभाषा नहीं है। पर पेनी स्टॉक उन शेयरों को कहा जाता है जो बहुत कम कीमत वाले होते हैं। आम तौर पर 10 रुपये से कम दाम वाले शेयर पेनी स्टॉक्स कहलाते हैं। इनकी मार्केट कैपिटल भी कम होती है और ज्यादातर एक्सचेंजों पर नॉन-लिक्विड होते हैं। ये ज्यादातर कम रिसर्च वाले स्टॉक होते हैं और अधिकतर निवेशकों को इनकी जानकारी नहीं होती।
क्यों होता है जोखिम
सबसे अहम सवाल होता है कि इन कंपनियों की मार्केट कैपिटल बहुत कम होती है। किसी कंपनी की जितनी अधिक मार्केट कैपिटल होती है वो उतनी ही स्थिर होती है। जबकि कम मार्केट कैपिटल वाली कंपनी अस्थिर होती है। इनके लिए अनुमान लगाना भी मुश्किल होता है। इसलिए इनमें जोखिम अधिक होता है। हालांकि नये और कम जानकारी रखने वाले निवेशक इन पर दांव लगाते हैं।
क्यों खरीदते हैं निवेशक
देखा जाता है कि नये निवेशक 10,000 रुपये जैसी छोटी निवेश राशि के साथ कोई 1 रुपये वाला पेनी स्टॉक खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें 10,000 शेयर मिलते हैं। दूसरी ओर, कोई भी स्थिर कंपनी के 1000 रु वाले 10 शेयर खरीद सकता है। मगर कम जानकारी होने के कारण निवेशक कीमत और वैल्यू के बीच के अंतर को समझने में विफल होते हैं।
कीमत में हेरफेर आसान
स्टॉक कंपनियों की कम मार्केट कैपिटल के कारण किसी भी ट्रेडर के लिए पैनी स्टॉक की कीमत में हेरफेर करना बेहद आसान है। कोई व्यक्ति इन शेयरों की एक बड़ी मात्रा में 1-2 करोड़ रु का निवेश कर सकता है और फिर शेयर की कीमत में वृद्धि कर सकता है। यह भारी मांग एक तरह का भ्रम होता है और शौकिया निवेशक तथ्यों को जाने बिना पैसा लगाना शुरू कर देते हैं। यही चीज मैनिपुलेटर को भारी मुनाफे के साथ स्टॉक से बाहर निकलने का मौका देती है, जिससे अन्य निवेशक पेनी स्टॉक में साथ फंस जाते हैं।
लगातार बेहतर प्रदर्शन नहीं
कई निवेशक ऐसी कंपनियों में पैसा लगाते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि ऐसी कंपनियां समय के साथ ग्रोथ करेंगी। मगर हर कंपनी ऐसा कर पाए ये बहुत मुश्किल है। 2-3 तिमाही नतीजों से किसी कंपनी का टर्नअराउंड नहीं होता है। किसी स्मॉल कैप कंपनी को लगातार बेहतर परिणाम देने होते हैं। इसलिए अगर आप कभी ऐसी किसी कंपनी को चुनें तो कई चीजों पर ध्यान दें। ऐसी कुछ स्मॉल कैप कंपनियां हैं, जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है और स्मॉल से ब्लूचिप तक का सफर तय किया है।
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