हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) नियम, 2008 में संशोधन की घोषणा करके दिव्यांगजों की उम्मीदों को नए अरमान देने का काम किया है।
इस फैसले से दिव्यंगजनों(PwDs) को राज्य की प्रशासनिक सेवाओं में योगदान देने की उनकी आकांक्षाएं पूरी होने के अवसर बढ़ने तय हैं। जब समाज में ऐसे लोगों को भी न सिर्फ मुख्यधारा में लाने के लिए कोई सरकार सोचती है, बल्कि अग्रिम पंक्ति में जगह बनाने की उनकी क्षमता को सम्मान देती है तो ऐसे राज्य सही मायने में कल्याणकारी कहलाते हैं।

दिव्यांगजों को खट्टर सरकार ने दिया एक और सम्मान
नए नियम के मुताबिक हरियाणा लोक सेवा आयोग अब से दिव्यांगजों को हरियाणा सिविल सेवा (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देगा।
इस परीक्षा में शामिल होने वाले दिव्यांगजनों के लिए यह आवश्यक है कि वह अंग्रेजी और हिंदी भाषा की परीक्षा में न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करें। पहले अंग्रेजी और हिंदी के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंकों की आवश्यकता थी जो कि अनिवार्य विषय हैं।

इस तरह के दिव्यांगजनों की खुलेगी किस्मत
नए संशोधनों की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। राज्य सरकार ने साफ किया है कि अगर हरियाणा सिविल सेवा की भर्ती के दौरान अगर विकलांग कोटा का पद खाली रहता है तो हरियाणा स्टाफ सर्विस कमीशन उन्हें शामिल कर सकता है, जिन्होंने मेरिट लिस्ट में हिंदी और अंग्रेजी में 35% अंक प्राप्त किए हों।

बैकलॉग पूरी करने का भी रास्ता साफ
हरियाणा सरकार के इस फैसले से दिव्यांगजों के कोटे में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया और आसान हो गई है। इस फैसले के साथ ही हरियाणा सिविल सेवा में14 रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी, जो कि लंबित पड़े हैं। अब से इसी हिसाब से परीक्षा के लिए विज्ञापन में बदलाव किया जाएगा और दिव्यांगजनों के कोटा को भी बताया जाएगा

दिव्यांगजनों को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के खुले द्वार
यही नहीं, राज्य सरकार ने दिव्यांगजों को रोजगार देने के लिए और भी रास्ते खोले हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि राज्य में करीब 35,000 दिव्यांगजनों को रोजगार मिलेंगे, जिनमें से 15,000 सरकारी क्षेत्र में और बाकी निजी क्षेत्र में उपलब्ध करवाए जाएंगे।

पिछले साल मई में निजी सेक्टर में दिव्यांगजों को रोजदगार दिलाने के लिए 'यूथ फॉर जॉब' कपनी और राज्य सरकार के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह एमओयू युवाओं को रोजगार देने को लेकर किया गया था, जिसमें दिव्यांगजन भी शामिल थे।
जाहिर है कि हरियाणा की खट्टर सरकार समाज के उस वर्ग के लिए भी समान रूप से सोचती है, जिसे आमतौर पर उपक्षित छोड़ दिया जाता रहा है।
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