Haryana News: हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार की नई आबकारी नीति 2024-25 प्रदेश के कल्याण के लिए दूरगामी सोच के साथ तैयार की गई है। अगर शराब के लाइसेंस के नियमों के लिए किए गए बदलावों को देखें तो राज्य सरकार ने जहां एक ओर राजस्व बढ़ाने पर ध्यान दिया है तो शराब के सामाजिक दुष्प्रभावों का भी ख्याल रखा है।
12 जून से प्रभावी होन वाली हरियाणा की नई आबकारी नीति में पहले तो वार्षिक लाइसेंस शुल्क बढ़ाकर 16 लाख रुपए से 20 लाख रुपए कर दिया गया है। इससे सरकारी खजाने में आय बढ़ेगी और यह किसी भी सरकार के राजस्व का बहुत बड़ा साधन होता है।

सामाजिक जिम्मेदारी समझती है हरियाणा सरकार
लेकिन, जहां हरियाणा सरकार ने राजस्व बढ़ोतरी का ध्यान रखा है, वहीं यह भी तय कर दिया है कि अब से बार और पब आधी रात तक ही खुलेंगे। जबकि, पहले इसके लिए देर रात 2 बजे तक की छूट दी जाती थी। इस तरह से नायब सिंह सरकार ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझा है।

राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ जन कल्याण की सोच वाली नीति
हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि राज्य सरकार ने बारों और पबों पर रात 12 बजे के बाद पूरी तरह से ताला लगाने का फरमान जारी कर दिया है। जो बार और पब फिर भी रात 2 बजे तक खुला रखने की इच्छा रखते हैं, उन्हें अतिरिक्त 20 लाख रुपए का भुगतान करना होगा। यही नहीं, जो चाहेंगे कि वह पूरी रात ही अपनी दुकान खुली रखें, उन्हें हर अतिरिक्त घंटे के लिए सालाना 5 लाख रुपए अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा।

इस तरह से हरियाणा सरकार ने जहां एक तरफ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का काम किया है, वहीं दूसरी तरफ जनता के खजाने में अतिरिक्त राजस्व जुटाने की भी व्यवस्था तैयार की है।

बहुत ही सूझबूझ के साथ तैयार की गई है नीति
शराब कई बार सामाजिक अव्यस्था की वजह बन जाती है। लेकिन, मौजूदा समय में इसे कोई सरकार पूरी तरह से नकार भी नहीं सकती, क्योंकि यह सरकार की आमदनी का एक बहुत बड़ा जरिया भी है। ऐसे में कोई सरकार अगर इस सेक्टर को इस तरह से नियंत्रित करना चाहती है कि उसकी आमदनी भी बनी रहे और यह समाज पर ज्यादा दुष्प्रभाव न डाल पाए तो इससे अच्छी पहल क्या हो सकती है।

क्योंकि, यह तय है कि इस तरह से देर रात शराब का शौक रखने वाले लोग उच्च मध्यम और उच्च वर्ग के परिवारों से ताल्लुक रखने वाले होते हैं। उन्हें अपना शौक पूरा करने के लिए थोड़ा ज्यादा जेब ढीली करने में भी खास परेशानी होने की संभावना नहीं है। लेकिन, अगर इनकी वजह से अगर किसी कल्याणकारी सरकार की कमाई बढ़ती है तो उसका अंतिम लाभ तो समाज के अंतिम कतार में बैठे आखिरी व्यक्ति तक ही पहुंचने वाला है।
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