नई दिल्ली, जुलाई 13। कश्मीर की एक लड़की इंशा रसूल एक दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालय में मॉलिक्यूलर सिग्नलिंग की पढ़ाई कर रही थी। मगर वे 'जैविक खेती' के बारे में और जानना चाहती थीं। वह अपने इस जुनून को आगे बढ़ाने के लिए पीएचडी छोड़ कर वापस कश्मीर लौट आईं। मगर फिर उन्हें ऐसी कामयाबी मिली कि उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे ऑर्गेनिक सब्जियों का बिजनेस कर रही हैं, जिससे उनकी कमाई लाखों में है।
शुरू की अपनी कंपनी
इंशा ने दो साल पहले "होमग्रीन्स" नाम से अपनी 'फार्म-टू-फोर्क' कंपनी की शुरुआत कर दी थी। उनके पास 3.5 एकड़ की पैतृक जमीन थी, जिस पर उनका परिवार अपने लिए फसल और सब्जियां उगाता था। पर इंशा ने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट लॉन्च किया। उन्होंने किसानों के पास विजिट करना, बीज और खाद खरीदना शुरू कर दिया, और मजदूरों को पौधे लगाने, जुताई करने और ऐसे अन्य कार्यों के लिए काम पर रखा।
बीज उगाने की कोशिश में महीनों बिताए
इंशा ने महसूस किया कि एक वैज्ञानिक होने के कारण केवल अध्ययन करना ही फसल उगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विभिन्न मौसमों में विभिन्न प्रकार के बीज उगाने की कोशिश में महीनों बिताए। कृषि जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इंशा कहती हैं कि उन्हें सफलताओं से ज्यादा असफलताएं मिलीं। कभी-कभी फसल नहीं उगती थी, या खाद काम नहीं करती थी। यानी उन्हें अपने कामयाबी के सफर में चुनौतियों का सफर खूब करना पड़ा।
कैसे आई इस सेगमेंट में रुचि
बेंगलुरू में भारतीय विज्ञान संस्थान से ग्रेजुएट इंशा कई जगहों पर हरी-भरी वनस्पतियों और ठंडे तापमान के साथ रहती हैं। वह कश्मीर, दिल्ली और बेंगलुरु में रहने के बाद दक्षिण कोरिया चली गई, जहां तापमान अधिक अनुकूल था। उन्होंने कहा कि, उनके परिवार का बैकग्राउंड कृषि का रहा है। एक बार वे अपने बच्चे के साथ स्कूल विजिट के दौरान स्ट्रॉबेरी के खेत में गईं, जहां से उनमें इसे लेकर दिलचस्पी बढ़ी।
स्ट्रॉबेरी की खेती ने किया आकर्षित
इंशा ताजा, रंगीन स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए नियोजित उल्लेखनीय तकनीक से चकित रह गयीं। उन्होंने अपने पती से कहा कि कितना अच्छा होगा अगर कश्मीर में कोई ऐसा ही करे। उन्होंने कहा कि जब हमारे पास जमीन है तो हम किसी और का इंतजार क्यों करें। उन्होंने छह महीने की सावधानीपूर्वक तैयारी और रिसर्च के बाद सब कुछ छोड़ने का फैसला किया।
तगड़ी है कमाई
इंशा इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अपनी फसल बेचती हैं। उनके अनुसार, अधिकांश उपज 24 घंटे के भीतर बिक जाती है। उन्होंने पिछले साल नवंबर और दिसंबर में करीब 8 लाख रुपये कमाए। वह धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं। वह विभिन्न फ्रोजन सब्जियां जैसे कि फ्रेंच बीन्स और मटर के साथ ही ब्लैंच्ड स्वीट कॉर्न और टमाटर बेचकर अच्छा पैसा कमा रही हैं। इसके अलावा इंशा ने अपने ब्रांड नाम के तहत पूरे भारत में यूनीक सब्जियों और अचार जैसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग के लिए स्थानीय किसानों के साथ सहयोग किया है। वह कहती हैं कि हर महीने औसतन 15-20 किसानों को रख कर उन्हें बाजार दर से अधिक कीमत की पेशकश की जाती है।
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