नई दिल्ली, जुलाई 25। बहुत कम ऐसे लोग हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार की योजना 'पीएम-कुसुम योजना' के बारे में सुना होगा। बता दें कि यह योजना किसानों की आय को कई गुना करने में मदद कर रही है। आज हम आपको इस योजना के बारे में विस्तार से बताएंगे। किसान इस योजना से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। पीएम कुसुम योजना को 2019 में शुरू किया गया था। इसके बाद इस योजना का विस्तार किया गया है। आगे जानिए इस स्कीम की डिटेल।
ये है पहला फायदा
इस योजना का पहला फायदा यह है कि किसान इस योजना के जरिए 70 से 80 फीसदी की सब्सिडी पर सोलर पंप अपने खेत में लगवा सकते हैं। इस योजना के सहारे वे अच्छी कमाई भी कर सकते हैं। इस योजना की मदद से यदि किसान अपनी जमीन पर सोलर पैनल लगवाए तो उसे सिर्फ 10 फीसदी रकम का भुगतान करना होगा। वहीं केंद्र और राज्य सरकार उसके बैंक खाते में 60 फीसदी सब्सिडी की रकम देंगी।
केंद्र और राज्य सरकार का योगदान
जो 60 फीसदी पैसा पीएम कुसुम योजना के तहत किसान को दिया जाएगा, उसमें से केंद्र और राज्यों की ओर से बराबर योगदान दिया जाएगा। यानी 30-30 फीसदी। तीसरी चीज बैंक की ओर से 30 फीसदी लोन भी मिलेगा, जो किसान अपनी आमदनी से बाद में आसानी से चुका सकता है।
कैसे होगी कमाई
पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों की जमीन पर जो सोलर पैनल लगाए जाते हैं, उससे वे बिजली बना सकते हैं। बिजली या डीजल से चलने वाले सिंचाई पंप की जगह सोलर एनर्जी से चलने वाले पंप लगाए जाते हैं। सोलर पैनल से जो बिजली तैयार होगी उससे किसान सिंचाई कर सकेंगे, जबकि अतिरिक्त बिजली को वे बेच सकेंगे। इस तरह वे 25 साल तक आमदनी कर सकते हैं।
कितनी होगी कमाई
सौर ऊऱ्जा से डीजल और बिजली के खर्च से राहत मिलने के साथ साथ प्रदूषण कम होगा। किसानों को प्रति एकड़ 60 हजार रुपए से 1 लाख रुपए तक की कमाई आसानी से हो सकती है। ये इनकम वे 25 सालों तक हासिल कर सकते हैं।
जानिए आवेदन का तरीका
पीएम कुसुम योजना के लिए आवेदन करने के लिए आपको सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। ऑनलाइन पंजीकरण फॉर्म भरने के बाद, आपको आधार कार्ड, खसरा सहित भूमि दस्तावेज, एक घोषणा पत्र, बैंक खाता डिटेल आदि जैसी आवश्यक जानकारी देनी होगी। आवेदन पत्र और दस्तावेज स्वीकृत होने के बाद, आप पीएम कुसुम योजना के लिए पंजीकृत हो जाएंगे। यह योजना ग्रामीण भूमि मालिकों के लिए उनकी सूखी / अनुपयोगी भूमि के उपयोग से 25 वर्षों की अवधि के लिए आय का एक स्थिर और निरंतर स्रोत देगी। इसके अलावा अगर सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के लिए खेती वाले क्षेत्रों को चुना जाता है, तो किसान फसल उगाना जारी रख सकते हैं क्योंकि सौर पैनल न्यूनतम ऊंचाई से ऊपर स्थापित किए जाते हैं। यह योजना सुनिश्चित करेगी कि ग्रामीण लोड केंद्रों और कृषि पंप-सेट लोड के लिए पर्याप्त स्थानीय सौर / अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित बिजली उपलब्ध हो, जिसके लिए ज्यादातर दिन के समय बिजली की आवश्यकता होती है।
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