
Success Story : 51 वर्षीय ललिता संजय खैरे पुणे की रहने वाली हैं। उन्होंने करीब दो दशक पहले कोकम शरबत बनाने का बिजनेस शुरू किया था। तीन साल तक उन्होंने अपने बिजनेस को घाटे में चलाया। मगर फिर ललिता ने अपने वेंचर कोकणराज से 2.5 करोड़ रु से अधिक सालाना कमाना शुरू किया। उन्होंने अपना बिजनेस चलाने के लिए घर तक बेच दिया। रिश्तेदारों की नाराजगी का सामना किया। ये सब वे अपने बिजनेस के लिए करती रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत और हिम्मत रंग लाई और आज वे करोड़पति बिजनेसवुमन हैं। उनके कारोबार ने ने कई उतार-चढ़ाव दिखाए।
31 साल पहले की शुरुआत
ललिता 31 साल पहले 1992 में अपना कारोबार शुरू किया। तब उनकी शादी को 2 साल हुए थे। उनके अनुसार उन्हें कोई रेगुलर नौकरी नहीं करनी थी। उस समय कारोबार उनके लिए एक बढ़िया विकल्प था। उन्होंने शुरुआत सीप मशरूम की खेती से की। मगर उन्हें भारी नुकसान हुआ। द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार तब मशरूम की खेती करने के लिए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के लाइसेंस की जरूरत होती थी।
अपने घर से किराए के मकान में पहुंचे
ललिता के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी जल्दी बिगड़ गई। इसलिए उन्हें अपना घर बेचना पड़ा। इसके बाद वे किराए के मकान में शिफ्ट होने पर मजबूर हो गए। इस कारोबार में कोई सफलता नहीं मिली। कुछ सालों के अंदर उन्हें ललिता को इसे बंद करना पड़ा। हालांकि उनकी लागत निकल गयी थी और वे कर्ज चुकाने में भी कामयाब हो गयी थीं।
रिश्तेदार बिजनेस को नहीं करते थे पसंद
असल में ललिता एक ऐसे परिवार से आती हैं जो सर्विस सेक्टर में रहा है। इसलिए ललिता के लिए अपने करीबी रिश्तेदारों को एक कारोबारी बनने की अपनी इच्छा के बारे में समझाना बहुत मुश्किल रहा। उनके अनुसार कोई भी रिश्तेदार उनसे सहमत नहीं था। वे एक सेफ नौकरी करने की सलाह दे रहे थे, जिसमें हर महीने एक फिक्स सैलेरी मिलती है।
1995 में आया बदलाव
1995 में ललिता और उनके पति संजय ने कोकम पर किस्मत आजमाने का फैसला किया और अपनी कंपनी कोकणराज के साथ एक शरबत पेश किया। उनके इस बिजनेस को ग्रोथ हासिल करने में लगभग चार साल लग गए। जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब उन्हें अपना सब कुछ बेचना पड़ा था। उनके पास केवल 500 रुपये थे। इस 500 रु को भी उन्होंने कोकम शरबत बनाने के कारोबार में लगा दिया।
अब कितनी है कमाई
अब उनकी कमाई करोड़ों में है। कारोबार के प्रोसेस पर ललिता कहती हैं कि कोकम शरबत बनाने की अवधि केवल तीन से चार महीने तक चलती है। बाकी साल वे रेस्ट करती हैं। वे फरवरी में शुरू करते हैं और मई की शुरुआत तक, कारोबार के इस हिस्से को बंद कर देती हैं। बीते सालों में ललिता और उनके पति ने पूरे भारत में वितरकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया है। उनके कुछ वितरकों में बड़े नाम शामिल हैं। जैसे कि बिग बास्केट, रिलायंस फ्रेश, डी-मार्ट, बिग बाजार, दोराबजीस और स्टार बाजार। ये सब इनसे थोक में सामान खरीदते हैं, पैकेज करते हैं और बेचते हैं।
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