एक समय ऐसा भी था जब टपरवेयर को बच्चा-बच्चा जानता था. हर किसी के पास इस ब्रांड का टिफिन, पानी की बोतल और कई अन्य चीजे हुआ करती थी. लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि ये ब्रांड कर्ज में डूब गया. चलिए आज इसकी पूरी कहानी जानते हैं.

टपरवेयर एक अमेरिकी कंपनी है. कंपनी का कहना है कि उनकी सेल इतनी कम हो गई है कि उनकी कंपनी का कभी भी दिवालिया निकल सकता है. लेकिन इतनी मशहूर कंपनी डूबी कैसे?
2000 से पहले था फेमस
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक टपरवेयर ब्रांड की शुरुआत 1946 में केमिस्टअर्ल टपर द्वारा की गई थी. जब दुनिया में दूसरे विश्व युद्ध हुआ यानी 1950 के बाद टपरवेयर हर घर में मौजूद था. उस समय ये काफी फेमस ब्रांड हुआ करता था.
इससे बनाने का उद्देश्य यहीं था कि कोई ऐसा कंटेनर हो, जिसमें खाना एयर टाइट करके लंबे समय तक रखा जा सकें. क्योंकि उस समय विश्व युद्ध चल रहा था और लोगों को ऐसे केंटनर की तलाश थी, जिसमें वे विश्व युद्ध से पीड़ित लोगों को खाना दे सकें और ये खाना लंबे समय तक बासी ना हो.
ऐसा कंटेनर अर्ल टपर ने दिया. उन्होंने इस कंटेनर को पेंट के डिब्बे की तरह एयरटाइट बनाया. ताकि लोगों को खाना जल्दी बासी ना हो. उस समय इस प्रोडेक्ट की मांग काफी ज्यादा था.
कंपनी को क्या हुआ अब घटा
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक कंपनी के प्रोडक्ट्स की सेल पिछले कुछ सालों से लगातार घट रही है. लेकिन कोविड के समय टपरवेयर के प्रोडेक्स की डिमांड काफी बढ़ चुकी थी. क्योंकि उस समय भी लोग घर पर ही कुकिंग किया करते थे और उन्हें ऐसा कोई केंटनर चाहिए था, जिसमें वे अपना खाना सुरक्षित स्टोर करके रख सकें.
लेकिन कंपनी बढ़ता कॉम्पटीशन नही झेल पाई और उन्हें कर्ज का सामना करना पड़ा. कंपनी ने कर्ज लेकर खुद को कई बार कवर करने की कोशिश की. लेकिन कंपनी आज कर्ज में डूब चुकी है. के दौर में कंपनी टिक नहीं पाई. कंपनी लगातार कर्ज ले लेकर खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती रही, लेकिन तेजी से घटते रेवेन्यू के चलते अब कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुकी है.
करोड़ो के कर्ज में डूबी कंपनी
टपरवेयर कंपनी बढ़ता कॉम्पटीशन नहीं झेल पाई और उसे आज करोड़ों रुपयों के कर्ज का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा कंपनी को कच्चा माल, मजदूरी और ट्रांसपोर्ट में बढ़ते खर्च की वजह से भी भारी नुकसान हुआ है. इस नुकसान की वजह से कंपनी का मार्जिन प्रभावित हुआ है. ऐसा कहा जा रहा है कि कंपनी ने करीब 70 करोड़ डॉलर यानी लगभग 5870 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है. अब परिस्थिति ये है कि टपरवेयर और लेनदारों के बीच बातचीत भी शुरू हो गई है.
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