नयी दिल्ली। मुश्किल में एमएसएमई (सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर की मदद के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। अब सरकारी कंपनियां, केंद्रीय मंत्रालयों और विभाग एमएसएमई से जरूरत से ज्यादा सामान खरीद रहे हैं ताकि सेक्टर की मदद हो सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में अब तक सरकारी कंपनियां, केंद्रीय मंत्रालयों और विभाग ने 13000 करोड़ रु से ज्यादा का सामान और सेवाएं खरीदी हैं। इसमें से 4,203 करोड़ रुपये की खरीदारी एमएसएमई से की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा वार्षिक खरीद, जिनमें से सरकार के निर्देश के अनुसार 25 प्रतिशत एमएसएमई से खरीदना जरूरी है, पहले से ही 32.22 प्रतिशत की बेहतरीन दर बनाए हुए है। इस बात का खुलासा सार्वजनिक खरीद नीति निगरानी पोर्टल एमएसएमई संबंध पर प्रकाशित आंकड़ों से हुआ है।
कितनी एमएसएमई को मिला फायदा
सरकार और सरकारी संस्थाओं की तरफ से की जारी खरीद से 11,459 एमएसएमई को फायदा मिला है। इसमें 332 एससी / एसटी उद्यमियों के नेतृत्व वाली एमएमएसई शामिल हैं, जिन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 में 122.68 करोड़ रुपये की वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री की। ये एमएमएसई से कुल खरीद की 0.94 प्रतिशत है। सरकार द्वारा जरूरत से ज्यादा एमएसएमई से खरीदारी भारत में बनी चीजों के प्रोडक्शन और खरीदारी पर ज्यादा ध्यान देने के तहत की गई है। चीन के साथ सीमा विवाद के बाद भारत का ध्यान मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स पर है।
चीन से आयात घटाने पर जोर
सरकार चीनी कंपनियों से भारतीय उद्यमों और छोटे व्यवसायों में आने वाले हर निवेश की जांच बढ़ा रही है। साथ ही सरकार चीन से आयात घटाने पर भी ध्यान दे रही है। सरकार कोरोना महामारी के चलते भारतीय कंपनियों में अवसरवादी अधिग्रहण पर भी अंकुश लगाना चाह रही है। इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने Vocal For Local का आह्वान किया।
महिलाओं को ज्यादा फायदा
महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार की इस खरीद नीति के तहत लाभान्वित महिलाओं के नेतृत्व वाली एमएसएमई की संख्या चालू वित्त वर्ष में अब तक एससी / एसटी उद्यमियों के नेतृत्व वाले एमएसएमई से अधिक रही। 450 महिला उद्मियों के नेतृत्व वाली एमएसएमई को फायदा मिला, जिन्होंने सरकार को 95.88 करोड़ रु का सामान और सेवाएं बेचीं, जो कुल खरीदारी का 0.73 प्रतिशत है। 2020-21 में अब तक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सबसे अधिक 1,500 करोड़ रुपये, ऊर्जा मंत्रालय ने 989.6 करोड़ रुपये, भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय ने 459.1 रु, रक्षा मंत्रालय ने 396.3 करोड़ रुपये और कोयला मंत्रालय ने 308.3 करोड़ रुपये की खरीदारी की है।
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