RBI ने केवल 2,000 रुपए के नोट में ही दावा की जा रही रकम की आपूर्ति की है तो भी आंकड़ों में 34,000 करोड़ रुपए का अंतर है।
लगातार हो रही आलोचना के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लोगों को यह ठोस जानकारी दे पाने में नाकाम साबित हो रही है कि आखिरकार उसने कितने नए नोट जारी किए। बुधवार को जारी की गई अपनी नवीनतम प्रेस विज्ञप्ति में RBI ने कहा कि उसने लोगों को कुल 22.6 अरब नोटों की आपूर्ति की जिसका कुल मूल्य 5.93 लाख करोड़ रुपए है, लेकिन इस संख्या के आधार पर वितरित की गई रकम RBI के पहले के बयानों से मेल नहीं खाती है और जोड़ घटाव करने पर गणितीय रूप से असंभव साबित होती है।

वास्तव में, शीर्ष बैंक द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों और पहले के आंकड़ों में काफी बड़ा झोल दिख रहा है और इनमें 66,000 करोड़ रुपए से अधिक का अंतर है। माना जा रहा है कि उच्च मूल्य के 10 फीसदी नोट 500 रुपए के नोट में वितरित किए गए। लेकिन अगर हम यह भी मान लें कि RBI ने केवल 2,000 रुपए के नोट में ही दावा की जा रही रकम की आपूर्ति की है तो भी आंकड़ों में 34,000 करोड़ रुपए का अंतर है।
इस बारे में आईएएनएस द्वारा बार-बार स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद RBI ने कोई जवाब नहीं दिया। 7 दिसंबर को मौद्रिक नीति की प्रेस वार्ता में RBI के डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने मीडिया को सूचना दी थी कि अब तक कुल 4 लाख करोड़ रुपए नए नोट बैंकों के माध्यम से वितरित किए गए हैं।
इस रकम में से कुल 1.06 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 19.1 अरब नोट छोटे नोट के रूप में जारी किए गए। जबकि बाकी के 2.94 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट बड़े नोट (500 और 1000 रुपए के नोट) में जारी किए गए।
12 दिसंबर को RBI के डिप्टी गवर्नर ने बताया था कि 21.8 अरब नोट 10 दिसंबर तक जारी किए गए हैं जिनका मूल्य 4.61 लाख करोड़ रुपए है। अगले दिन RBI ने बताया कि इनमें से 20.1 करोड़ नोट 10 से 100 रुपए मूल्य वाले हैं, जबकि ऊंचे मूल्य वाले नोट 170 करोड़ जारी हुए हैं। इनका हिसाब लगाने पर 31,000 करोड़ रुपए का अंतर मिलता है।


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