पकौड़े को रोजगार से जोड़ने के मुद्दे पर राजनीति खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ देश में पीएम मोदी के पकौड़े बेचने के बयान पर राजनीति हो रही है और चुटकी ली जा रही है वहीं सरकार की तरफ से लगातार इस बयान के संबंध में तार्किक जवाब देने का प्रयास किया जा रहा है। इस क्रम में बीजेपी के अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद अमित शाह ने भी अपनी राय रखी।
पकौड़ा शर्मनाक नहीं: अमित शाह
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमित शाह ने राज्यसभा में अपने पहले भाषण में सोमवार को कहा कि पकौड़ा बेचना शर्मनाक नहीं है, लेकिन इसकी तुलना भीख मांगने से करना शर्मनाक है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर दिए गए अपने भाषण में उन्होंने बेरोजगारी पर भी अपनी बात रखी। शाह ने कहा कि पकौड़े बेचना बेरोजगार रहने से ज्यादा बेहतर है।
बेरोजगार रहने से ज्यादा बेहतर पकौड़ा बेचना: शाह
उन्होंने कहा, "कुछ लोग पकौड़ा बेचने के बारे में कई बातें कह रहे हैं। मैंने भी पी. चिदंबरम का ट्वीट पढ़ा। हां, मेरा मानना है कि बेरोजगार रहने से ज्यादा बेहतर पकौड़ा बेचना है।" अमित शाह ने कहा, "पकौड़ा बनाना व बेचना शर्म की बात नहीं है, लेकिन इसकी तुलना भीख मांगने से करना निश्चिय ही शर्मनाक है।"
पीएम मोदी का दिया उदाहरण
उन्होंने विपक्ष के शोरगुल के दौरान कहा, "आज यदि एक व्यक्ति पकौड़ा बेचकर अपना जीविकोपार्जन कर रहा है तो आने वाले कल में उसका बेटा एक बड़ा उद्योगपति बन सकता है। एक चाय विक्रेता का बेटा देश का प्रधानमंत्री बन सकता है।"
टीवी इंटरव्यू में पीएम ने दिया था बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र से पहले एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा था कि जो लोग पकौड़ा बेचकर रोजाना 200 रुपये कमा रहे हैं, उन्हें रोजगार संपन्न मना जा सकता है। मोदी के इस बयान की विपक्ष ने कड़ी निंदा की। विपक्ष ने कहा कि यह एक क्रूर मजाक है और यह भीख मांगने को भी रोजगार बताने जैसा है।
चिदंबरम ने की थी बयान की आलोचना
वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री यदि पकौड़ा बेचने को नौकरी कहते हैं, तो उसी तर्क से भीख मांगना भी एक नौकरी है। इस तरह सभी गरीब व अक्षम व्यक्तियों की गणना रोजगार कर रहे व्यक्ति के रूप में की जाए, जो जीविका के लिए भीख मांगने को मजबूर हैं।"
बेरोजगारी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार
शाह ने कांग्रेस के 55 साल के शासन को व्यापक रूप से बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार ठहराया। अमित शाह ने कहा कि देश में 55 साल कांग्रेस की सरकार थी। हम सात-आठ साल सत्ता में रहे है। यह समस्या (बेरोजगारी) ज्यादा भयावह नहीं हुई होती यदि 55 सालों के दौरान प्रभावी कदम उठाया गया होता।
दुविधा में रहती थी कांग्रेस सरकार: शाह
अमित शाह ने कहा, "यह याद करना उचित होगा कि 2013 में क्या परिस्थितियां थीं। यहां तक कि सीमा पर सुरक्षा करने वाले जवान भी सरकार की दुविधा की स्थिति की वजह से अपने वीरता का प्रदर्शन नहीं कर पाते थे। पूरी तरह से नीतिगत अक्षमता व्याप्त थी।"
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