भारत में स्टार्टअप शुरु करने की दौड़ के बीच एक सर्वे रिपोर्ट आई है, इस सर्वे की रिपोर्ट भारतीय युवाओं को थोड़ परेशान कर सकती है। सर्वे के मुताबिक भारत में स्टार्टअप शुरु करने वाले ज्यादातर युवाओं में से सिर्फ 5 प्रतिशत ही सफलता प्राप्त कर पाते हैं।
सिर्फ 5% सफल
रोजगार का मुद्दा भारत में बहुत गंभीर विषय बन गया है। ऐसे में जब सरकार लोगों को सीधे रोजगार देने के मुद्दे पर घिर चुकी हो तो उसपर ऐसे सर्वे रिपोर्ट और भी परेशानी बढ़ा देते हैं। मोदी सरकार देश में रोजगार और आंत्रपेन्योरशिप (खुद का रोजगार शुरु करने वाले उद्यमी) पर ज्यादा फोकस कर रही है। समाचार पोर्टल इकोनॉमिक टाइम्स ने इस सर्वे रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि, ग्लोबल आंट्रप्रन्योरशिप मॉनिटर (जीर्इएम) इंडिया रिपोर्ट, 2016-17 के मुताबिक, देश में 11 प्रतिशत लोग आंट्रप्रन्योरशिप से जुड़ते हैं। लेकिन सिर्फ पांच प्रतिशत को ही अपने कारोबार को स्थापित करने में सफलता मिलती है।
बिजनेस शुरु करने के बाद बंद कर देते हैं भारतीय
खुद का रोजगार शुरु करने के मामले में भारत का स्थान दुनिया में बहुत पीछे है। भारत में नया बिजनेस शुरु करके उसे बंद करने का भी अनुपात बहुत ज्यादा है। सर्वे की रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 26.4 प्रतिशत व्यवसाय शुरु करने के बाद बंद कर दिए जाते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक ये सर्वे गांधीनगर के आंट्रप्रन्योरशिप डिवेलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (र्इडीआर्इ) ने किया है।
3400 लोगों पर हुआ सर्वे
इस सर्वे में 18 से 64 साल के लोगों को शामिल किया गया है। सर्वे में करीब 3 हजार 400 लोगों की राय को शामिल किया गया है। सर्वे के मुताबिक करीब चार फीसदी आबादी ने उद्यमी बनने की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है। यह वर्ग सक्रियता के साथ कारोबार स्थापित करने में लगा है। अन्य सात फीसदी उद्यमी इस तरह के कारोबार में हैं, जिन्हें चलते हुए साढ़े तीन साल से कम समय बीता है।
क्या है ब्रिक्स देशों की स्थिति
सर्वे के मुताबिक, देश में केवल 5 प्रतिशत वयस्क आबादी ही अपना कारोबार जमाने में सफल हुर्इ है। सफल कारोबार ऐसे उद्यमों को माना गया है जो 42 महीने से ज्यादा पूरे कर चुके हैं। ब्रिक्स देशों में ब्राजील में इस्टैबलिश्ड बिजनस ओनरशिप की दर सबसे ज्यादा 17 प्रतिशथ है। दक्षिण अफ्रीका में यह सबसे कम तीन फीसदी है।
जल्दी बंद हो जाते हैं बिजनेस
चीन में बिजनस ओनरशिप की दर 8 प्रतिशत है। जबकि रूस और भारत इस मामले में 5-5 प्रतिशत के साथ बराबर हैं। कारोबार शुरू करके बंद करने की दर के भी बहुत ज्यादा होने के तमाम कारण हैं। 1.3 प्रतिशत मामलों में कारोबार नौकरशाही बाधाओं के चलते रुक गया। सात प्रतिशत कारोबार वित्तीय मुश्किलों के कारण बंद हो गए। 6.5 प्रतिशत मामलों में इसकी वजह निजी कारण रही।
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