आरबीआई की मौद्रिक नीति की तहत रेपो रेट की दर 0.25% की बढ़ोत्तरी की गई है। यानि की रेपो दर अब 6.25% होगी।
आरबीआई की मौद्रिक नीति की तहत रेपो रेट की दर 0.25% की बढ़ोत्तरी की गई है। यानि की रेपो दर अब 6.25% होगी। भारतीय रिजर्व बैंक में यह रेट इसलिए बढ़ाई है क्योंकि महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है यानि कि क्रूड ऑयल और इंधन के दाम को कंट्रोल करने के लिए यह दाम बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही यह अनुमान लगाया जा रहा है कि होम लोन महंगा हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने जून में होने वाली मॉनिटरी पॉलिसी में रेपो रेट में बढ़ोत्तरी के संकेत दिए थे।
एमपीसी में कोई बदलाव नहीं
इस दौरान बैंक निफ्टी धड़ाम से गिरा है। तो वहीं रेपो दर वृद्धि के बावजूद एमपीसी स्थिर है। आपको बता दें की आरबीआई की रेपो रेट में यह वृद्धि 2014 के बाद पहली बार हुई है जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है।
सीआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये 4% पर बरकरार है। इसके साथ ही सभी एमपीसी सदस्यों ने दर बढ़ाने के पक्ष में वोट किया है।
पहले से मिले थे संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने जून में होने वाली मॉनिटरी पॉलिसी में रेपो रेट में बढ़ोत्तरी के संकेत दिए थे। अप्रैल की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के अनुसार आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 4 से 6 जून को होने वाली अगली पॉलिसी रिव्यू में ब्याज दरों में तेजी का दौर लौटाने का समर्थन किया था।
वित्त वर्ष 2019 के लिए अनुमान
तो वहीं RBI ने वित्त वर्ष 2019 में ग्रोथ अनुमान 7.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। अप्रैल-सितंबर के बीच जीडीपी ग्रोथ 7.5-7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। अक्टूबर से मार्च के बीच जीडीपी ग्रोथ 7.3-7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआई ने महंगाई दर का अनुमान बढ़ा दिया है। तो वहीं अप्रैल-सितंबर के बीच महंगाई दर 4.8-4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
इसके अलावा अक्टूबर से मार्च के बीच महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मोदी सरकार के कार्यकाल में ऐसा हुआ पहली बार
अगर आप ना जानते हों तो आपको बता दें कि मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहली बार हुआ है कि आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाया है। तो वहीं रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में होने वाली एमपीसी मीटिंग पहली बार 3 दिन चली है। इससे पहले यह 2 दिन की होती थी। यह मीटिंग 4 जून से शुरु हुई थी।


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