बता दें कि सरकार ने 21 सरकारी बैंकों के मर्जर के लिए रिजर्व बैंक से एक लिस्ट बनाने को कहा है। इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक फंसे हुए कर्ज में घिरे बैंकों को मजबूत करने के लिए सरकार यह कदम
बता दें कि सरकार ने 21 सरकारी बैंकों के मर्जर के लिए रिजर्व बैंक से एक लिस्ट बनाने को कहा है। इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक फंसे हुए कर्ज में घिरे बैंकों को मजबूत करने के लिए सरकार यह कदम उठाना चाहती है। जानकारी के मुताबिक इस महीने में हुई मीटिंग में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने रिजर्व बैंक से कन्सॉलिडेशन का समय बताने के लिए भी कहा। वहीं उन्होंने कहा कि बैंकों के अच्छे नियमन के लिए ऐसा किया जा सकता है।

हालांकि दुनिया की 10 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत का इटली के बाद दूसरा स्थान है जिसका बैड लोन अनुपात सबसे ज्यादा है। भारत कई सालों से इससे निपटने की कोशिश कर रहा है। वहीं 90 फीसदी एनपीए सरकारी बैंकों का है। जो कि 21 सरकारी बैंकों में से 11 आरबीआई की निगरानी में इमर्जेंसी प्रोग्राम के तहत काम कर रहे हैं। हालांकि बता दें कि उनपर नया कर्ज देने से रोक लगाई गई है।
वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन रवि वेंकटेशन का पिछले महीने कहना हैं कि अगर बाजार में और नुकसान नहीं उठाना है तो सरकारी बैंकों का मर्जर जरूरी है। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में लगभग 70 प्रतिशत डिपॉजिट प्राइवेट बैंकों में जा चुका है। बैंकों की कमजोर बैंलेंस शीट की वजह से बैंकों की पूंजी सरकार पर निर्भर हो गई है।


Click it and Unblock the Notifications