नयी दिल्ली। साल 2019 कई भारतीय दिग्गज कारोबारियों के लिए काफी कठिनाई भरा। इनमें कई को नये दिवालिया कानून संपत्ति जब्त होना, दिवालिया होना, जेल और यहाँ तक की बढ़ते के दबाव की वजह से इस दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। कई कारोबारियों के लिए मुसीबत टली नहीं है, बल्कि नये साल में उनकी तकलीफें बढ़ सकती है। भारतीय बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट सुधारने के लिए रिकॉर्ड 39 अरब डॉलर के लोन को बट्टे खाते में डाल दिया यानी write off कर दिया। स्थिति तब और खराब हो गयी जब एनबीएफसी कंपनियो के सामने नकदी संकट आ गया, जिससे फंडिंग रुक गयी और कर्ज से दबे कारोबारियों पर और दबाव पड़ा। सरकार भी फरार कारोबारियों पर जनता के गुस्से को देखते हुए आर्थिक अपराधियों पर नकेल कस रही है। जो कारोबारी आर्थिक तंगी से जूझते दिखे उनमें अनिल अंबानी, कैफे कॉफी डे के स्वर्गीय वीजी सिद्दार्थ और जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल शामिल हैं। एक नजर डालते हैं 2019 में हुई कारोबारी हलचल पर।
अनिल अंबानी को लगा झटका
रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी जेल जाने से बचे। अगर उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी उनकी मदद न करते तो उन्हें जेल जाने से कोई न रोक पाता। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एरिक्सन एबी की भारत इकाई को 7.7 करोड़ डॉलर की बकाया राशि का भुगतान करने या जेल जाने के लिए कहा था। इस साल उनकी दूरसंचार कंपनी दिवालिया हो गयी। उनके खिलाफ लंदन की एक अदालत में एक चीनी कर्जदाता ने मुकदमा दर्ज करवाया। दवा और हॉस्पिटल कंपनी के मालिकों दोनों भाइयों मलविंदर और शिविंदर सिंह को अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया। इन दोनों पर धोखाधड़ी से एक कर्जदाता से लगभग 33.7 करोड़ डॉलर निकालने का आरोप लगा। वहीं फरवरी में मालविंदर ने शिविंदर और उनके आध्यात्मिक गुरु पर धोखाधड़ी का आरोप भी लगाया।
दुनिया छोड़ गये वीजी सिद्दार्थ
2019 में कैफे कॉफी डे के संस्थापक वीजी सिद्दार्थ ने नदीं में कूद कर आत्महत्या कर ली। उन्होंने लिखे सुसाइड नोट में लिखा कि उन्हें उधारदाताओं का दबाव, एक प्राइवेट इक्विटी फर्म और टैक्स अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न झेलना पड़ रहा था। उन्होंने लिखा कि मैंने लंबे समय तक संघर्ष किया लेकिन आज मैंने हार मान ली। वहीं फर्श से अर्श तक का सफर तय करने वाले बंद हो चुकी जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के लिए 2019 काफी कठिन रहा। मार्च में उन्होंने जेट एयरवेज का चेयरमैन पद छोड़ा। तगड़ी प्रतियोगिता और बढ़ती लागत ने जेट एयरवेज को नुकसान में धकेल दिया। फिर जुलाई में एक भारतीय अदालत ने नरेश गोयल के विदेश जाने पर रोक लगा दी। सरकार ने कहा था कि वे जेट एयरवेज से जुड़े 2.6 अरब डॉलर की धोखाधड़ी की जांच कर रही है।
राणा कपूर और सुभाष चंद्रा भी लटके
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर हैं। आरबीआई ने जब पाया कि यस बैंक ने बैड लोन की लगातार गलत जानकारी दी है तो उसने कपूर के बैंक में बतौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यकाल को बढ़ाने पर रोक लगा दी। नतीजा कपूर को बैंक के बोर्ड से बाहर होना पड़ा। अक्टूबर कपूर ने बैंक में अपनी सारी हिस्सेदारी बेच दी। चावल व्यापारी से मीडिया दिग्गज बने 69 वर्षीय सुभाष चंद्रा जिन्होंने 1990 के दशक में अपने ZEE टीवी के साथ भारतीय घरों में केबल टेलीविजन पहुँचाया, ने नवंबर में ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया और इस पर अपना नियंत्रण खो दिया। एस्सेल समूह का ऋण चुकाने में मदद करने के लिए, सुभाष चंद्रा पिछले कुछ महीनों से ज़ी एंटरटेनमेंट में हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
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