भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर को देखते हुए अडानी ग्रुप ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। ग्रुप ने अपने अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट विस्तार की योजनाओं को अभी के लिए टाल दिया है और पूरी ताकत घरेलू बाजार पर लगाने का मन बनाया है।

अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स के निदेशक जीत अडानी के मुताबिक, भारत में ही अगले कई सालों तक ग्रोथ की जबरदस्त संभावनाएं हैं, इसलिए विदेश में निवेश पर 4-5 साल बाद ही दोबारा विचार किया जाएगा।
भारत में ही दिख रही बड़ी संभावनाएं
एक खास बातचीत में जीत अडानी ने कहा कि देश में हवाई यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। इसी वजह से ग्रुप चाहता है कि पहले भारत में मौजूद एयरपोर्ट्स को पूरी क्षमता तक विकसित किया जाए। पहले अडानी ग्रुप पश्चिम एशिया, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में एयरपोर्ट प्रोजेक्ट देखने की सोच रहा था, लेकिन अब यह योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
एयरपोर्ट बिजनेस में होगा भारी निवेश
अडानी एयरपोर्ट्स अगले 5-6 वर्षों में भारत में करीब 1 लाख करोड़ रुपए निवेश करने की तैयारी कर रहा है। इस रकम का इस्तेमाल नए टर्मिनल, रनवे विस्तार, आधुनिक सुविधाएं और एयरपोर्ट के आसपास के विकास कार्यों में किया जाएगा। अभी ग्रुप आठ एयरपोर्ट्स का संचालन करता है, जहां से हर साल करोड़ों यात्री सफर करते हैं। अनुमान है कि बिना कोई नया एयरपोर्ट जोड़े भी आने वाले वर्षों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाएगी।
नवी मुंबई एयरपोर्ट बनेगा ग्रोथ इंजन
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ग्रुप को सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं। यह एयरपोर्ट अकेले ही लाखों नए यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। मुंबई का मौजूदा एयरपोर्ट लगभग पूरी तरह भरा हुआ है, ऐसे में नवी मुंबई प्रोजेक्ट बड़ी राहत साबित होगा। इसके अलावा अहमदाबाद, जयपुर और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी विस्तार का काम तेजी से चल रहा है।
एयरलाइन बिजनेस में एंट्री नहीं
अडानी ग्रुप ने साफ किया है कि उसका खुद की एयरलाइन शुरू करने का कोई इरादा नहीं है। ग्रुप केवल एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़े कारोबार पर ही ध्यान देगा।
कमाई का बदलेगा तरीका
भविष्य में अडानी एयरपोर्ट्स की कमाई का बड़ा हिस्सा रिटेल, फूड, होटल, लाउंज और सिटी-साइड डेवलपमेंट से आएगा। ग्रुप का लक्ष्य है कि हर यात्री से होने वाली औसत कमाई बढ़ाई जाए। इसके लिए डिजिटल सुविधाओं और बेहतर अनुभव पर भी जोर दिया जा रहा है।
आगे की रणनीति
एयरपोर्ट कारोबार की लिस्टिंग को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन 2030 के आसपास इस दिशा में कदम उठाया जा सकता है। अडानी ग्रुप का फोकस फिलहाल भारत में मजबूत, टिकाऊ और मुनाफे वाला एयरपोर्ट नेटवर्क खड़ा करने पर है, जो आने वाले वर्षों में देश की हवाई यात्रा को नई ऊंचाई दे सके।
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