नयी दिल्ली। एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों कंपनियों को एजीआर या एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू चुकाने में राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को टेलीकॉम कंपनियों की रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया। एयरटेल और वोडाफोन ने बकाया एजीआर के भुगतान मामले में सुप्रीम कोर्ट से तुरंत सुनवाई करने की अपील की थी। टेलीकॉम कंपनियों ने इस मामले में रिव्यू पिटीशन दाखिल करके शीर्ष अदालत से इस पर तत्काल राहत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिव्यू पिटीशन खारिज करने का मतलब है कि एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को 92000 करोड़ रुपये का एजीआर अदा करना ही होगा। टेलीकॉम कंपनियों की रिव्यू पिटीशन पर तीन न्यायाधीशों की बेंच ने सुनवाई की, जिनमें जस्टिस अरुन मिश्रा, एस अब्दुल नजीर और एमआर शाह शामिल हैं। पिछले साल इन्हीं तीन न्यायाधीशों की बेंच ने दूरसंचार विभाग की परिभाषा को सही करार दिया था।
एजीआर की परिभाषा को लेकर रही है तकरार
एजीआर एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटरों से लेता है। दरअसल एजीआर को लेकर एक विवाद रहा है क्योंकि दूरसंचार विभाग के मुताबिक एजीआर की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी की कुल आय पर होनी चाहिए, जिसमें जमा ब्याज या संपत्ति बेचने सहित होने वाली आय भी शामिल है। वहीं टेलीकॉम कंपनियाँ सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं की आमदनी पर एजीआर लगाये जाने की वकालत करती रही हैं। 2005 में सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दूरसंचार विभाग की परिभाषा का विरोध करते हुए TDSAT का रुख किया था, मगर उसने भी सभी तरह की आमदनी पर एजीआर की गणना को सही माना। वहीं पिछले साल अक्टूबर मे सुप्रीम कोर्ट ने भी इस परिभाषा पर मुहर लगा दी है।
23 जनवरी तक करना है एजीआर का भुगतान
अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने पक्ष में फैसला न पाकर टेलीकॉम कंपनियों ने शीर्ष अदालत में रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टेलीकॉम कंपनियों को 23 जनवरी तक एजीआर का भुगतान करना है। इनमें एयरटेल को 35,500 करोड़ रुपये और वोडाफोन को 53,000 करोड़ रुपये का एजीआर चुकाना है। एजीआर के लिए प्रोविजन बनाने की वजह से एयरटेल और वोडाफोन को 2019 की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारी घाटा हुआ था।
वोडाफोन ने कहा 'बंद करनी पड़ेगी कंपनी'
वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने एजीआर मामले पर कहा था कि बिना सरकार की मदद के टेलीकॉम कंपनी कारोबार बंद कर देगी। वहीं भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने भी सरकार से टेलीकॉम कंपनियों के प्रति सहानुभूति रखने को कहा। पिछले महीने टेलीकॉम कंपनियों द्वारा चार्ज बढ़ाये जाने के पीछे एक कारण एजीआर के भुगतान का दबाव ही था। जुलाई-सितंबर तिमाही में एजीआर के लिए प्रोविजन बनाने की वजह से एयरटेल और वोडाफोन को भारी नुकसान भी हुआ था।
यह भी पढ़ें - मोबाइल कंपनियों को सरकार का झटका, समय पर मांगा एजीआर का बकाया
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