नयी दिल्ली। एयरटेल और वोडाफोन ने बकाया एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर के भुगतान मामले में सुप्रीम कोर्ट से तुरंत सुनवाई करने की अपील की है। टेलीकॉम कंपनियों ने इस मामले में रिव्यू पिटीशन दाखिल करके शीर्ष अदालत से इस पर तत्काल राहत मांगी है। बता दें कि अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट का एजीआर को लेकर फैसला टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ गया था। अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर की दूरसंचार विभाग की परिभाषा को बरकरार रखा था, जिसके नतीजे में कंपनियों 92,642 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान करना है। इससे वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल को काफी झटका लगा। इसी मामले में अब कंपनियों की तरफ से रिव्यू पिटीशन दाखिल कर अर्जेंट सुनवाई की अपील की गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े से बात करने के बाद बतायेगा कि दायर की गई याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई होगी या नहीं। टेलीकॉम कंपनियों को 23 जनवरी तक एजीआर का भुगतान करना है। इनमें एयरटेल को 35,500 करोड़ रुपये और वोडाफोन को 53,000 करोड़ रुपये का एजीआर चुकाना है।

क्या है एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू
आपको बता दें कि एजीआर एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटरों से लेता है। एजीआर को लेकर एक लंबा विवाद रहा है क्योंकि दूरसंचार विभाग कहता है कि एजीआर की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी की कुल आय पर होनी चाहिए, जिसमें जमा ब्याज या संपत्ति बेचने सहित होने वाली आय भी शामिल है। वहीं टेलीकॉम कंपनियाँ सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं की आमदनी पर एजीआर की बात कहती रही हैं। 2005 में सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दूरसंचार विभाग की परिभाषा का विरोध करते हुए TDSAT का रुख किया था, मगर उसने भी सभी तरह की आमदनी पर एजीआर की गणना को सही माना। वहीं अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस परिभाषा पर मुहर लगा दी।
'बंद करनी पड़ेगी कंपनी'
वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने एजीआर मामले पर कहा था कि बिना सरकार की मदद के टेलीकॉम कंपनी कारोबार बंद कर देगी। वहीं भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने भी सरकार से टेलीकॉम कंपनियों के प्रति सहानुभूति रखने को कहा। पिछले महीने टेलीकॉम कंपनियों द्वारा चार्ज बढ़ाये जाने के पीछे एक कारण एजीआर के भुगतान का दबाव ही था। जुलाई-सितंबर तिमाही में एजीआर के लिए प्रोविजन बनाने की वजह से एयरटेल और वोडाफोन को भारी नुकसान भी हुआ था।
यह भी पढ़ें - मोबाइल कंपनियों को सरकार का झटका, समय पर मांगा एजीआर का बकाया
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