भारत का एविएशन सेक्टर हमेशा से उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कुछ निवेशकों ने इस क्षेत्र पर लंबी नजर बनाए रखी। दिवंगत दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला भी उन्हीं में से एक थे। जब ज्यादातर लोग एयरलाइंस से दूरी बना रहे थे, तब झुनझुनवाला ने न सिर्फ इंडिगो जैसे लो-कॉस्ट मॉडल पर भरोसा जताया बल्कि मुश्किल समय में एक नई एयरलाइन अकासा एयर पर भी दांव लगाया।

इंडिगो पर पहले से था भरोसा
करीब दस साल पहले, जब इंडिगो अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही थी, तब झुनझुनवाला ने कंपनी के मॉडल की खुलकर तारीफ की थी। उनका मानना था कि भारत जैसे बड़े और कीमत-संवेदनशील बाजार के लिए कम खर्च वाला मॉडल सबसे बेहतर है। बीते दशक में एविएशन सेक्टर ने कई झटके झेले, लेकिन झुनझुनवाला का भरोसा इस सेक्टर से नहीं डगमगाया।
कोरोना काल में बड़ा फैसला
2021 में, जब कोरोना महामारी के कारण उड़ानें ठप थीं और एयरलाइंस को भारी नुकसान हो रहा था, तब झुनझुनवाला ने अकासा एयर में प्रमोटर के तौर पर निवेश किया। यह फैसला उस समय काफी जोखिम भरा माना जा रहा था, लेकिन उन्होंने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया। यही वजह है कि आज अकासा एयर को निवेशकों की नजर से देखा जा रहा है।
क्या आ सकता है अकासा एयर का आईपीओ?
अकासा एयर ने अगस्त 2022 में अपनी व्यावसायिक उड़ानें शुरू कीं और धीरे-धीरे अपना नेटवर्क बढ़ाया। कंपनी के सीईओ विनय दुबे के अनुसार, अकासा अगले दो से पांच साल के भीतर आईपीओ लाने पर विचार कर सकती है। हालांकि, इसके लिए कंपनी को पहले अपने कारोबार को और मजबूत करना होगा।
अभी मुनाफे की राह लंबी
फिलहाल अकासा एयर का बाजार हिस्सा करीब 5 फीसदी है और ऑपरेटिंग स्तर पर कंपनी को नुकसान हो रहा है। इसके मुकाबले इंडिगो का मार्जिन काफी मजबूत है और वह पहले से बाजार की लीडर बनी हुई है। ऐसे में अकासा को स्केल, मुनाफा और नेटवर्क तीनों मोर्चों पर खुद को साबित करना होगा।
कर्मचारियों को जोड़ने की रणनीति
अकासा एयर ने अपने कर्मचारियों को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए ईएसओपी योजना भी शुरू की है। कंपनी ने हजारों कर्मचारियों को शेयर ऑप्शन दिए हैं, जिससे उनका भरोसा और जुड़ाव बना रहे। अगर भविष्य में आईपीओ आता है, तो इसका सीधा फायदा कर्मचारियों को भी मिल सकता है।
निवेशकों की नजर क्यों टिकी है?
आज शेयर बाजार में इंडिगो के अलावा कोई बड़ी लिस्टेड एयरलाइन नहीं है। निवेशक एक ऐसे विकल्प की तलाश में हैं जो इंडिगो को टक्कर दे सके। यही वजह है कि अकासा एयर और एयर इंडिया जैसी कंपनियों के आईपीओ को लेकर चर्चा तेज है।
आगे क्या?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अकासा एयर आने वाले वर्षों में मुनाफे में आ जाती है, तो उसका आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षक साबित हो सकता है। फिलहाल कंपनी को धैर्य के साथ विस्तार और लागत नियंत्रण पर ध्यान देना होगा। एविएशन सेक्टर में संभावनाएं बड़ी हैं, बस सही समय और सही रणनीति की जरूरत है।
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