नई दिल्ली, जुलाई 7। मारुति सुजुकी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। मारुति के पास आज पेट्रोल और सीएनजी कारें हैं। मगर अब समय बदलने के साथ मारुति भी अपनी लाइन-अप और प्रोडक्ट में बदलाव करती जा रही है। जैसे कि कंपनी का इरादा पेट्रोल कारें खत्म करने का है। मारुति सुजुकी ने पहले ही डीजल कारों का उत्पादन बंद कर दिया है। अह अगले चरण में ये उन कारों को बाहर कर देगी जो पूरी तरह से पेट्रोल पर चलते हैं। कंपनी कच्चे तेल के आयात और उत्सर्जन को कम करने के सरकार के उद्देश्य के साथ अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को तैयार करना चाहती है। यही वजह है कि इसने अब पेट्रोल कारों को लेकर नयी रणनीति बनाई है।
आप पर क्या पड़ेगा असर
बता दें कि मारुति की पेट्रोल कारों को खत्म करने की योजना 10 साल लंबी है। वैसे तो यह 10 साल बाद भी इन कारों को सपोर्ट और सर्विस देना जारी रख सकती है, मगर फिर भी ग्राहकों को संभवत: वो सुविधाएं न मिलें, जो अभी मिल रही हैं। इसलिए यदि आप मारुति की कोई पेट्रोल कार खरीदने की सोच रहे हैं तो कंपनी के इस प्लान को जरूर नजर में रखें।
7-10 साल का प्लान
मारुति अपने पूरे पोर्टफोलियो को हाइब्रिड, फ्लेक्स-फ्यूल, बायो-फ्यूल और शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तन करेगी। इस योजना को पूरा करने में मौजूदा प्लान्स के तहत कंपनी को अगले सात से 10 वर्ष लग सकते हैं। बता दें कि मारुति अप्रैल 2020 में भारत में बीएस-VI उत्सर्जन मानकों को अपनाने से पहले ही डीजल वाहनों का उत्पादन बंद कर चुकी है।
पर्यावरण के लिए बेहतर टेक्नोलॉजी पर काम जारी
सुजुकी मोटर यूनिट के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर सीवी रमन ने कहा कि कंपनी पर्यावरण के अनुकूल कई प्रौद्योगिकियों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा है कि अगले दशक में, हम सभी वाहनों को कंवर्ट कर देंगे। कंपनी के पास कोई भी शुद्ध पेट्रोल वाहन नहीं होगा। मारुति के सारे वाहन इलेक्ट्रिक या सीएनजी होंगे।
ये है शानदार प्लान
रमन ने कहा कि सभी वाहनों को 2022-23 वित्तीय वर्ष में कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी स्टैंडर्ड (सीएएफई) को पूरा करना होगा। साथ ही, बीएस-VI चरण 2 को अगले वर्ष में पूरा किया जाना है। साथ ही उत्सर्जन नियमों को कड़ा करने का अगला चरण 2027 और 2032 में होगा। अभी इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ समस्या यह है कि इनकी कीत अभी फोसिल फ्यूल से चलने वाले यात्री वाहनों के बराबर नहीं है। इस सेगमेंट में फुल इलेक्ट्रिफिकेशन में समय लगने की संभावना है। इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों में मौजूदा कीमतों की लागत निकलने में सालाना लगभग 35,000-40,000 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
कितना ड्राइव करते हैं भारतीय
डेटा के अनुसार भारतीय खरीदार सालाना औसतन 10,000 किमी ड्राइव करते हैं। इसलिए कारों को इलेक्ट्रिक सेगमेंट में लोगों के अपनाने की उम्मीद अधिक और पहले है। इस समय प्राइस बैरियर के अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करना फिलहाल एक चुनौती है। 60% से अधिक भारतीय सड़क पर कार पार्क करते हैं और केवल 20-25% के पास ही चार्जिंग पॉइंट हैं। इस बीच मारुति सुजुकी एक मध्यम आकार की एसयूवी पेश करने के लिए तैयार है। ये कार मजबूत हाइब्रिड तकनीक द्वारा संचालित होगी।
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