नई दिल्ली, अक्टूबर 15। आज का समय ओटीटी प्लेटफॉर्म का है। अमजेन सबसे शानदार ओटीटी प्लेटफॉर्म्स में से एक है। आज के समय में इसके 17.5 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। हाल ही में कंपनी ने भारतीय यूजर्स के लिए एक ऐलान किया था। कंपनी ने भारत में अपना काफी पसंद किया जाने वाला मासिक प्राइम सब्सक्रिप्शन फिर से शुरू किया है। इस साल की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक के एक दिशानिर्देश (रेकरिंग ऑनलाइन ट्रांजक्शन को प्रोसेस के प्रमाणीकरण के एक अतिरिक्त कारक का कार्यान्वयन) के बाद इसे बंद कर दिया था। इसके बाद अमेजन अब तक केवल तीन महीने और वार्षिक प्राइम सब्सक्रिप्शन दे रही था। मगर इसने अपना सबसे सस्ता मासिक 129 रु वाला प्राइम सब्सक्रिप्शन प्लान फिर से पेश किया है।
कैसे मिलेगा ये प्लान
अमेजन का मासिक प्लान सभी इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से नहीं खरीदा जा सकता है। 129 रु प्रति माह वाला प्राइम सब्सक्रिप्शन प्लान अब अमेज़न पर लिस्टेड तो है, लेकिन इसे केवल क्रेडिट कार्ड या चुनिंदा डेबिट कार्ड के माध्यम से ही खरीदा जा सकता है। वहीं ई-कॉमर्स दिग्गज ने अब प्राइम मेंबरशिप के लिए तीन सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए हैं। इसके वार्षिक प्लान की कीमत 999 रु और तीन महीने के प्लान की कीमत 329 रु है, जो पहले 387 रु थी। इन दोनों प्लान को अमेजन की साइट से सभी इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से खरीदा जा सकता है।
आरबीआई के निर्देशों का पालन जरूरी
अमेजन के नियम और शर्तें पेज के अनुसार 129 रु वाला मासिक प्राइम मेंबरशिप केवल उन्हीं बैंकों के माध्यम से खरीदा जा सकता है जिन्होंने आरबीआई के ई-मैंडेट दिशानिर्देशों का अनुपालन किया है। सभी बैंक जिन्होंने इस नियम का अनुपालन नहीं किया है, वे ऑटोमैटेड भुगतान की किसी भी रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
क्या है नियम
यदि आप आरबीआई के नये नियम से अंजान हैं तो बता दें कि नया नियम रेकरिंग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करने के लिए ऑथेंटिकेशन के एक अतिरिक्त फैक्टर (एएफए) का कार्यान्वयन करने के लिए कहता है। आरबीआई के नए दिशानिर्देशों के कारण, अमेजन ने अगले निर्देश तक अमेजन प्राइम के नि:शुल्क ट्रायल के लिए न्यू मेंबर साइन-अप को भी बंद कर दिया था। ये अभी भी प्रभाव में है।
बैंकों पर असर
आरबीआई का नया निर्देश बैंकों को 5,000 रुपये तक के रेकरिंग ट्रांजेक्शन के लिए वन टाइम एएफए लागू करने के लिए कहता है। इस कट-ऑफ से ऊपर के लेन-देन के लिए हर भुगतान पर एएफए की आवश्यकता होगी। नए दिशा-निर्देश पहली बार 2019 में पेश किए गए थे ताकि उपभोक्ताओं को अपने कार्ड पर अनावश्यक रेकरिंग पेमेंट करने से रोका जा सके। आखिरकार यह नियम 1 अक्टूबर को लागू हुआ।
आसान शब्दों में समझिए नियम
1 अक्टूबर से, जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अनिवार्य कर दिया है, बैंकों और अन्य वित्तीय कंपनियों को ग्राहकों से एडिश्नल फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन प्रोवाइड करने के लिए कहना होगा। ऐसा तब होगा जब भुगतान के लिए ऑटो-डेबिट पेमेंट 5,000 रुपये से ऊपर हो। यानी आपको ऐसी पेमेंट को पहले अप्रूव करना होगा। बैंक अपने ग्राहकों को इस नए नियम की जानकारी मैसेज के जरिए दे रहे थे।
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