Ambedkar Jayanti School Holiday: बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती को हर साल पूरे देश में 14 अप्रैल को मनाया जाता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती अलग-अलग हिस्से में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर जिनको बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 14 अप्रैल, 1891 को हुआ था।

अप्रैल महीने में कई सारे त्योहार पड़ रहे है। ऐसे समय में स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तरों के साथ ही बैंक बंद रहेंगे। ये छुट्टियां धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व की हैं। इन अवकाश में लोग त्योहार मनाने के साथ ही बाहर जाने के प्लान भी बना सकते हैं।
अप्रैल महीने के शुरुआत से ही स्कूली बच्चों के लिए अच्छी खबर बनी हुई है। इस महीने कई बड़े त्योहार पड़ रहे हैं जिस वजह से छुट्टियां मिलने वाली हैं। अगर बच्चे इन दिनों में कहीं घूमने फिरने जाने वाले हैं, तो चलिए जानते हैं कितनी छुट्टियां पड़ेंगी। 10 अप्रैल यानी महावीर जयंती, 14 अप्रैल डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती और 18 अप्रैल गुड फ्राइडे का सार्वजनिक अवकाश मिलने वाले हैं।
बाबासाहेब की देश के प्रति कड़ी मेहनत और उनके द्वारा किए गए अहम कामों श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है। बाबासाहेब का पूरा जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, इसके साथ ही उन्होंने देश की आजादी में अपना अहम किरदार निभाया और स्वतंत्रता के बाद देश के संविधान के निर्माण में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। भीमराव अंबेडकर ने जीवन भर कमजोर लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
अम्बेडकर की समानता के लिए लड़ाई
डॉ. अंबेडकर ऐसे व्यक्त थे जिन्हें कई सारी भाषाओं की भी जानकारी थी। वहीं, उन्हें भाषाओं के साथ ही कई सारे विषयों के बारे में भी पता था जिसमें राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री, दार्शनिक, मानवविज्ञानी और समाज सुधारक। उन्होंने दलितों और अन्य उत्पीड़ित समूहों के अधिकारों के लिए काफी वकालत की। उनका काम जाति व्यवस्था को खत्म करना और शिक्षा और सामाजिक सुधारों के जरिए से कमजोर तपको के लोगों को मजबूत बनाना था।
अंबेडकर जयंती का महत्व सिर्फ़ जश्न मनाने से कहीं ज़्यादा है, यह आज़ादी के दशकों बाद भी जारी जाति-आधारित भेदभाव की याद दिलाता है। इस दिन को मनाकर लोग सभी नागरिकों के लिए समानता और न्याय को बढ़ावा देने में बाबासाहेब के कड़े प्रयासों को स्वीकार करते हैं।
अम्बेडकर जयंती की ऐतिहासिक जड़ें
अंबेडकर जयंती मनाने की परंपरा 14 अप्रैल 1928 को पुणे में शुरू हुई थी, जिसकी शुरुआत उनके समर्पित अनुयायी और सामाजिक कार्यकर्ता जनार्दन सदाशिव रणपिसे ने की थी। तब से यह पूरे भारत में पब्लिक हॉलिडे बन गया है, जो डॉ अंबेडकर की विरासत के प्रति राष्ट्र के सम्मान को दिखाता है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की विरासत
भारतीय संविधान के निर्माण में डॉ. अंबेडकर की भूमिका अहम है; यह जाति, धर्म, नस्ल या संस्कृति से परे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार तय करता है। उनका सपना एक समावेशी समाज बनाना था जहां सभी को समान मौके मिले।
अंबेडकर जयंती का जश्न सिर्फ़ एक ऐतिहासिक शख्सियत को याद करने के बारे में नहीं है, बल्कि असमानता के खिलाफ़ चल रहे संघर्ष को पहचानने के बारे में भी है। यह इस बात पर चिंतन करने को प्रोत्साहित करता है कि समाज कितनी दूर आ गया है और सच्ची समानता हासिल करने के लिए और क्या करने की ज़रूरत है।
यह वार्षिक उत्सव भेदभाव को खत्म करने और सही वातावरण को बढ़ावा देने के रास्ते में निरंतर प्रयास करने के लिए एक आह्वान है, जहां हर की दिशा में व्यक्ति बिना किसी पक्षपात के फल-फूल सके।
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