Svatantra Microfin: भारत के अरबपतियों में सुमार कुमार मंगलम बिड़ला की 29 साल की बेटी अनन्या बिड़ला की माइक्रो फाइनेंस कंपनी दूसरे नंबर पर आ चुकी है। इसका नाम स्वतंत्र माइक्रोफिन है। भारत में इस कंपनी को अनन्या ने उस समय शुरू किया था जब वह महज 17 साल की थीं। अनन्या ने पिछले हफ्ते अरबपति सचिन बंसल की कॉम्पिटीटिव कंपनी चैतन्य इंडिया फिन क्रेडिट का अधिग्रहण कर लिया और इसके बाद यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी माइक्रोफिन कंपनी बन चुकी है।
इस डील के बाद स्वतंत्र माइक्रोफिन नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी को प्रबंधन के तहत संपत्ति के मामले में दूसरे नंबर पर लाकर खड़ा कर दिया है। यह करीब 130 बिलियन रुपए यानी 1.6 बिलियन डॉलर के आसपास है। अनन्या ने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक के जरिए साझा की है। अनन्या ने लिखा कि हम भारत की नंबर वन कंपनी बनने की ओर अग्रसर है।

इस समय पब्लिकली ट्रेडेड बेंगलुरू स्थित क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी माइक्रोफाइनेंस कंपनी है, जो नंबर वन पर बरकरार है। 30 सितंबर 2023 तक प्रबंधन के तहत 2.7 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ यह नंबर एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी बनी हुई है। एक डाटा के अनुसार 31 मई 2023 तक इस कंपनी का टोटल लोन पोर्टफोलियो 43 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। यह भारतीय माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री की कंपनी पूरे भारत में करीब 70 मिलियन (7 करोड़) लोगों को लोन दे चुकी है।
माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री बॉडी के सीईओ आलोक मिश्रा ने कहा है कि स्वतंत्र माइक्रोफिन द्वारा सचिन बंसल के चैतन्य माइक्रोफाइनेंस कंपनी का अधिग्रहण किया जाना स्वतंत्रता के साथ ही माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए भी एक अच्छी खबर है। उन्होंने कहा कि यह अधिग्रहण दक्षिण भारत में स्वतंत्र माइक्रोफाइनेंस की पहुंच को बेहतर बनाने में काफी मददगार साबित हो सकता है। स्वतंत्र अपने बेहतर संचालन और जिम्मेदारी पूर्वक लोन देने के लिए जाना जाता है, इस वजह से ज्यादा साइज कंपनी को और मजबूत बनाएगी और इकॉनमी ऑफ स्केल के माध्यम से दक्षता को और बढ़ा पाएंगे।
अनन्या ने 2012 में स्वतंत्र को स्थापित किया और 2013 में ग्रामीण महिला उद्यमियों को छोटे ऋण की पेशकश करते हुए इसका परिचालन शुरू किया था। इसके बाद अनन्या की कंपनी लगातार बढ़ती रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2019 तक इसकी कुल 280 ब्रांच थीं. जो नवंबर 2020 तक बढ़कर 500 ब्रांच हो गईं। मई 2023 तक पूरे भारत में इसकी टोटल 800 शाखाएं हो गईं। 14.8 बिलियन रुपए के अधिग्रहण के बाद इस कंपनी की शाखाएं 1500 से भी ज्यादा हो जाएंगी और इसकी पहुंच भारत के 20 राज्य में होगी साथ ही प्रबंधन के तहत 124 अरब रुपये की संपत्ति होगी जो 36 लाख ग्राहकों को सेवा प्रदान करेगी।
गौरतलब है की स्वतंत्र के लिए सबसे बड़ा अंतर इस बात से आ जाता है कि यह 100 कैशलेस डिसबर्समेंट भी करती है। जिससे पूरी प्रक्रिया काफी ज्यादा आसान हो जाती है।
अनन्या ने ट्वीट में कहा कि पिछले दशक को पीछे मुड़कर देखना काफी अवास्तविक लगता है। स्वतंत्र पहली कंपनी थी जिसकी स्थापना मैंने भारत के हर कोने में मौजूद बैंकिंग सुविधा से वंचित हर एक महिला को वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने के लक्ष्य के साथ की थी।


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