नई दिल्ली, सितंबर 26। अनिल अंबानी को एक और झटका लगा है। उनकी कर्ज में डूबी रिलायंस कैपिटल की सब्सिडिरी कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड बिकने के लिए तैयार है। रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के अधिग्रहण के लिए दो कंपनियां मिल कर बोली लगाएंगी। इनमें पिरामल समूह और ज्यूरिख इंश्योरेंस शामिल हैं। ये दोनों कंपनियां मिल कर बोली लगाने की योजना बना रही है। आगे जानिए इन कंपनियों की पूरी प्लानिंग।
आधी-आधी हो सकती है हिस्सेदारी
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को खरीदने के लिए पिरामल समूह और ज्यूरिख इंश्योरेंस एक स्पेशल यूनिट की स्थापना करेंगी। उसमें पिरामल समूह और ज्यूरिख इंश्योरेंस दोनों का हिस्सा 50-50 फीसदी हो सकता है। दोनों ही कंपनियां पहले ही नॉन-बाइंडिंग टेंडर्स दाखिल कर चुकी हैं। इन्होंने रिलायंस कैपिटल के जनरल इंश्योरेंस बिजनेस के लिए पिछले महीने ये टेंडर जमा करे थे।
ज्यूरिख इंश्योरेंस का अलग प्लान
डेब्ट रेजोल्यूशन प्रोसेस से गुजर रही रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने के लिए ज्यूरिख इंश्योरेंस ने अलग से भी ऑफर की पेशकश की है। मगर इसका रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को खरीदने के लिए पिरामल समूह के साथ गठजोड़ का कोई संकेत नहीं है।
ज्यूरिख इंश्योरेंस की एंट्री
अगर पिरामल समूह और ज्यूरिख इंश्योरेंस मिल कर रिलायंल जनरल इंश्योरेंस को खरीद लेते हैं तो इससे ज्यूरिख इंश्योरेंस की भारत के सामान्य बीमा कारोबार में एंट्री हो जाएगी। एक अनुमान के अनुसार रिलायंस जनरल इंश्योरेंस की वैल्यू करीब 9,450 करोड़ रुपये है।
रिलायंस कैपिटल का बुरा हाल
हाल ही में खबर आई थी कि रिलायंस कैपिटल के शेयरों की वैल्यू जीरो हो गई है। अनिल अंबानी की इस कंपनी के शेयरों में कारोबार भी रोक दिया गया था। गौरतलब है कि डीमैट से सभी शेयर डेबिट हो चुके हैं। कंपनी में पब्लिक शेयर होल्डिंग 94 फीसदी से ज्यादा है, यानी 94 फीसदी से अधिक शेयर रिटेल निवेशकों के पास हैं।
इस कंपनी पर भी रोक
रिलायंस कैपिटल के अलावा अनिल अंबानी ग्रुप की एक और कंपनी रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग के शेयरों में लेन-देन को रोका गया है। असल में रिलायंस नेवल के लिए भी दिवालिया प्रक्रिया चल रही है। एक्सचेंजों ने कंपनी के शेयरों को एडिशनल सर्विलांस मेजर (एएसएम) में रखा है। एएसएम में आने का मतलब है कि सप्ताह में केवल एक बार इन शेयरों में ट्रेडिंग की अनुमति होगी। अगर कोई कंपनी अपना कर्ज न लौटा पाए तो कर्ज देने वाले इंसॉल्वेंसी रेजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू करा सकते हैं। ये उनका अधिकार होता है। इस अधिकार के जरिए कर्ज की रकम की प्राप्ति करना है। कर्जदार इसके लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल या एनसीएलटी के पास जा सकते हैं। फिर 6 महीने के लिए कंपनी की सारी संपत्ति फ्रीज हो जाती है। इन 6 महीनों में एनसीएलटी कंपनी को रिवाइव करने सहित अन्य समाधानों पर विचार करती है। नवंबर 2021 में आरबीआई ने रिलायंस कैपिटल के बोर्ड को भंग करके इसका मैनेजमेंट खुद संभाल लिया था। इसके बाद कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रोसेस शुरू करने के लिए इसने एनसीएलटी का रुख किया था। अनिल अंबानी की कंपनियों पर काफी कर्ज है। वे लंबे समय से इस कारण हो रही कार्रवाइयों का सामना कर रहे हैं।
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