Bakra Eid : मुस्लिम समाज के सबसे बड़े त्योहारों में से एक बकरीद यानी ईद उल-अजहा जिसे मुस्लिम लोग काफी धूमधाम से मनाते हैं। बाजारों में बकरों के साथ व्यापारी पहुंचने लगे हैं क्योंकि अब सिर्फ 2 से 3 दिन बचे हैं, जिस वजह से बाजारों में रौनक आ गई है।
इस बार बाजार में बकरों की किमते आसमान छू रहे हैं जिस वजह से बकरों के खरीदारों को थोड़ा सोचना पड़ रहा है उनका कहना है इस बार व्यापारियों ने बकरों के दाम काफी ज्यादा चढ़ा रखें हैं वहीं व्यापारियों का कहना है की इस बार उन्हे काफी ज्यादा किराए भाड़े के साथ लाना पड़ा है जिस कारण कहीं न कहीं बकरों के दामों में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। बकरा कारोबारियों का कहना है की कीमत बढ़ी होने के चलते इस बार मंडी में अभी तक बकरों की खरीदारी में तेजी नहीं आई है।

कितनी कीमत में बिक रहे हैं बकरे
17 जून को बकरीद मनाने का अनुमान है इस बार बकरों कीमत में 20000 रुपए की कीमत से 100000 रुपए कीमत तक के बकरे बिक रहे हैं, हालांकि बकरों की बाजार में इस बार बकरा खरीदारों में थोड़ी कम उत्सुकता दिख रही है उनका कहना है हर साल के मुताबिक इस बार व्यापारियों ने बकरे की कीमत में काफी ज्यादा बढ़ा रखी है जिस वजह से खरीदारों को काफी सोचना पड़ रहा है।
बकरीद का त्योहार 3 दिन तक मनाया जाता है कारोबारी पहले दिन कीमतों में थोड़ा इजाफा रखते ही हैं, दूसरे और तीसरे दिन बकरे की कीमत में गिरावट कर देते हैं क्योंकि उन्हे वापिस ले जाना पड़ेगा जिस वजह थोड़ा रेट कम करके बेच देता हैं। इस बार बकरों की कीमत 20000 रुपए से 40000 रुपए तक के अच्छे बकरे बाजार में बिक रहे हैं।
ईद उल-अजहा का त्योहार कब से शुरू हुआ
इस्लामिक तौर तरीके के हिसाब से ईद उल-अजहा यानि बकरीद पर कुर्बानी की शुरुआत हजरत इब्राहीम के दौर से शुरू हुई थी, हजरत इब्राहीम को अल्लाह का पहला पैगंबर माना जाता है, इस्लामिक धर्म के अनुसार अल्लाह ने एक बार अपने पैगंबर इब्राहीम का इम्तिहान लेने को कहा जिसमें ये कहा जाता है अल्लाह ने अपने पैगंबर इब्राहीम के ख्वाब में जाकर उनसे कहा तुम अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी और अजीज चीज की कुर्बानी दो, जिसमें हजरत इब्राहीम ने कहा मेरी सबसे प्यारी चीज मेरी औलाद है, उनका बेटा इस्माइल ही उन्हे सबसे अजीज और अकारीब है, जिसने कुछ वक्त पहले ही पैगंबर इब्राहीम के घर पर जन्म लिया था। पैगंबर इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माइल को अल्लाह की राह में कुर्बान करने के बारे में ठान लिया था।
ईद उल-अजहा का महत्व
बकरीद हज यात्रा के बाद मनाई जाती है और इसे ईद-उल-अज़हा या ईद उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है। आपको ये पता होना इसे "बलिदान का त्यौहार" कहा जाता है क्योंकि यह पैगंबर इब्राहिम की अल्लाह के प्रति समर्पण दिखाने के लिए अपने बेटे की बलि देने की इच्छा को याद करता है। मुसलमान इस चीज को जानवरों की कुर्बानी देकर और मांस को अपने घरों, रिश्तेदारों और गरीबों के साथ साझा करके मनाते हैं। इस कुर्बानी का खास महत्व ये भी है अल्लाह हमेशा प्रति हमेशा अपना ध्यान लगाए रखना।
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