Festival Season में सोने-चांदी की बहुत मांग हैं। दिवाली और धनतेरस के मौके पर सोने चांदी की खरीददारी करना बेहद ही शुभ माना जाता हैं। यदि आप इस त्योहार के मौके पर सोने-चांदी के जेवर को खरीदने का विचार कर कर रहे हैं, तो फिर आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद ही जरूरी हैं। मसलन सोने की शुद्धता, मोल-भाव, बिल, सोने का करेंट रेट आदि। यदि आप पक्का बिल लेते हैं, तो फिर ये आपके सोने को खरीदने का रिकार्ड होता हैं। ये आपको सोने की शुद्धता का भरोसा तो दिलाता है। ही इसके साथ ही टैक्स से संबंधित जो पूछताछ होती हैं। उसमें भी आपकी सहायता करता हैं।
प्रमाण पत्र वैधता
उपयुक्त बिल के बिना सोने की जो खरीदारी होती हैं वो गैर-कानूनी व्यापार गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। इनवॉइस से पता चलता है कि आपने उस जौहरी से शुद्धता और मूल्य का एक खास जेवर खरीदा है। एक जो उपयुक्त इनवॉइस होता हैं। उसमें बनाई फीस, सोने का रेट और आपने जो जीएसटी चुकाया हैं वो भी दर्ज रहता हैं। यह जो विवरण होता हैं। इसके अभाव में आपकी खरीददारी में अधिक कीमत वसूली जा सकती हैं।
इन चीजों का ध्यान दे
हॉलमार्क, मेकिंग चार्जेस पर मोलभाव, कीमतों का भी ध्यान रखें, बिल, चेक करें।
क्या होगा वैध स्वामित्व प्रमाण न होने पर
वर्ष 2016 में सरकार ने बरामदगी और तलाशी के दौरान में मिलने वाली अघोषित संपत्ति जो थी। उस पर जुर्माना लगा दिया है। इसका अर्थ यह हैं। जहां विरासत में मिले हुए उन जेवरों के लिए कोई सीमा-रेखा नहीं है। जिन जेवरों का आपके पास हिसाब हैं। वही बिना हिसाब वाले जो जेवर हैं। उसमें सीमा पार होने पर जुर्माना लगाया जा सकता हैं। यदि प्रमाण नहीं दे पाते हैं, तो फिर ऐसी स्थिति में लिमिट से अधिक अगर सोना रखते हैं, तो फिर आपको 60 प्रतिशत जुर्माना देना पड़ सकता हैं और 25 प्रतिशत का सरचार्ज लग सकता हैं।


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