
Budget 2023 : बस कुछ ही दिनों में बजट 2023 आने ही वाला है, देश के टैक्सपेयर्स यह देखने के लिए काफी उत्सुक हैं। कि सरकार ने टैक्सपेयर्स के लिए क्या रखा है। सरकार 1 फरवरी 2023 को बजट 2023 पेश करने की तैयारी कर रही हैं, टैक्सपेयर्स को बजट से कई सारी उम्मीदें हैं। जो उन्हें पूरी होने की आशा हैं। आइए जानते है इसके बारे में।
टैक्स में राहत
करदाताओं को बजट 2023 से कई सारी उम्मीदे हैं। इन उम्मीदों में एक सबसे बड़ी उम्मीद करों को कम करने की हैं। कई सारे लोग जीवन जीने की लागत में वृद्धि की वजह से अपने गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, अगर टैक्स में कमी होती हैं, तो फिर ये राहत स्वागत होगा। चाहे इनकम टेक्स में कमी हो या कर आधार का विस्तार हो। टैक्सपेयर किसी भी तरह की राहत कर रहे हैं। जो करदाताओं अपनी जो मेहनत की कमाई को अपनी जेब में रखने की परमिशन देगा। इसके अलावा, बजट 2017 के बाद से टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, केवल एक ही चीज हुई है। वो नई कर व्यवस्था को शुरू हुई हैं। जिसमें पिछले 2 सालों में अधिक खरीददार नहीं थे। इसमें कई सारे कटौतियां और छूटें हैं। जैसे- एचआरए, एलटीए, 80सी आदि। जो करदाताओं के बीच काफी अधिक लोकप्रिय हैं, उनको वापस ले ली गईं।
छूट और कटौती
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स की धारा 80सी की जो 1.5 लाख की लिमिट है उस पर पुनर्विचार करना चाहिए, जो उपभोक्ता मुद्रास्फीति सूचकांक में 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद 2014 से अपरिवर्तित बनी हुई है। सरकार की तरफ से नई व्यवस्था है। इसके तहत कई इस लाभ को सक्षम करने के जो विकल्प हैं। इस पर विचार मूल्यांकन कर सकती है। टेक्स सेविंग की वजह से लोगों के पास अधिक डिस्पोसेबल इनकम होगी, जिस वजह से हमारे देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी। इतना ही नहीं 80सी टैक्सपेयरेस को अधिक अवधि की सेविंग स्कीम में इन्वेस्ट करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है, इसमें कई सारी योजनाएं हैं। जैसे- नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) और पब्लिक प्रोविंडेट फंड (पीपीएफ) आदि। इसके अलावा सरकार को किफायती घर के फायदे, 2 साल और उससे अधिक के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने और इन कटौती की सीमा में इजाफा करने पर विचार करना चाहिए।
वेतनभोगी श्रेणी के करदाता
करदाताओं के लिए परेशानी का एक अन्य क्षेत्र रोजगार है। पहले कोरोना महामारी और फिर छंटनी की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी के नुकसान को संबोधित करने और कर्मचारियों की परेशानी को कम करने के उपायों की उम्मीद कर रहे हैं। वर्तमान में जो कर प्रावधान हैं। वो छंटनी के मुआवजे पर छूट प्रदान करते हैं। हालांकि, छूट का फायदा लेना हैं, तो फिर छूट का फायदा लेने के लिए कुछ जरुरतों को पूरा करना होगा। अगर नियोक्ता की स्कीम इन जरुरतों पूरा नहीं करती है, तो फिर जो कर्मचारी है। वो कटौती का दावा करने में असमर्थ हो सकता है। इसके अलावा कटौती की सीमा 5,00,000 रुपये को कम से कम 10,00,000 रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा जो पुरानी कर व्यवस्था हैं इसके तहत कर्मचारियों के लिए 50 हजार रुपये की मौजूदा मानक कटौती है। इसको बढ़ायी जाना चाहिए। इसको बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है। पुरानी और नई दोनों योजनाओं के तहत सरकार को इस लाभ में इजाफा करने के बारे में विचार करना चाहिए।
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