
Budget 2023: इस वर्ष भी 1 फरवरी को बजट 2023 पेश किए जाना है और वित्त मंत्री पर देश भर की निगाहें टिकी हुई है। इस बजट से आम आदमी को काफी उम्मीदें हैं। इसके साथ ही सभी क्षेत्रों को भी बजट से भारी उम्मीदें हैं। ऐसे में जो रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष निकाय राष्ट्रीय रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) हैं। नारेडको ने भी केंद्र की मोदी सरकार को बजट से पहले अपनी सिफारिशों से अवगत कराया है।
नारेडको ने इनकम टैक्स अधिनियम के कुछ वर्गों संशोधित करने की सिफारिश की है
सरकार को दिए अपने ज्ञापन में नारेडको ने सुझाव दिया है। कि कुछ नियमों और कराधार ब्लॉक है। अगर इनको समाप्त कर दिया जाए, तो रियल एस्टेट बिजनेस ज्यादा विकसित हो सकता है। विशेष रूप से रियल एस्टेट कस्टमर्स को फिर से आकर्षित करना चाहते है। इसके लिए ब्याज कटौती की उम्मीद में हैं। इसके साथ ही नारेडको ने इनकम टैक्स अधिनियम के कुछ वर्गों संशोधित करने की सिफारिश की है या उसको हटाने की भी सिफारिश की है। कमर्शियल संस्थाओं और व्यक्तिगत निवेशकों को रियल एस्टेट सरीखे कैपिटल इंसेटिव सेक्टर में निवेश करने को प्रोत्साहित करना इन सिफारिशों का मकसद है।
सिफारिश आयकर अधिनियम की धारा 23(5) हटाने की
इसके अलावा नारेडको ने सरकार से आग्रह किया है, कि आयकर अधिनियम की धारा 23 (5) को हटाया जाना चाहिए, यह जो अधिनियम है। यह आवास से काल्पनिक किराये की इनकम से संबंधित है। नारेडको के प्रेसिडेंट राजन बंदेलकर की तरफ से कहा गया है। कि, डेवलपर्स को सेक्शन 23(5) के तहत जो नोशनल रेंटल इनकम है। इस पर टैक्स के बोझ से छूट दी जानी चाहिए इस पर राजन बंदेलकर ने तर्क देते हुए कि नोशनल रेंट वसूलने का जो विचार है। यह विचार देश में रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने का विरोध करता है। गौरतलब है देश के प्रमुख महानगरों में साल 2022 में आवासीय संपत्तियों की बिक्री में तेजी से जुड़ी बिक्री के साथ समाप्त हुआ है। कमर्शियल लीजिंग में कोरोना के बाद सुधार देखा गया है। इस वजह से नारेडकों ने सरकार से आयकर अधिनियम की धारा 24(बी) के तहत ब्याज कटौती की सीमा में इजाफे में विचार करने की सिफारिश की है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा भी दिया जाए रियल एस्टेट को
नारेडको के प्रेसिडेंट राजन बंदेलकर को तरफ से कहा गया है। कि इस सेक्टर यानी रियल एस्टेट में अगर आगे भी वृद्धि जारी रखना है, तो फिर उद्योग में विश्वास बढ़ते उपायों को अपनाने की जरूरत है। इसमें धारा 24 (बी) के तहत होम लोन की जो कटौती सीमा है। इसको 2 लाख रूपये से बढ़ाकर 5 लाख करना शामिल है। देश में आवास की कमी को इस तरह की मांग को बढ़ावा देने से पूरी की जा सकेगी। गौरतलब है। देश का रियल एस्टेट सेक्टर कोरोना महामारी के भारी और विपरीत परिस्थितियों का सामना कर इन संकट से बाहर आ रहा है। देश के रियल एस्टेट सेक्टर ने साल 2022 में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी वजह से आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए उम्मीदें और भी परवान पर है।
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