Budget 2026 Expectations: साल 2025 अब खत्म होने वाला है और उससे पहले आगामी बजट 2026 को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। इस तैयारियों के बीच एक बार फिर से मिडिल क्लास बजट में राहत मिलने की उम्मीद लगाए हुए है। मिडिल क्लास की प्रमुख मांगों में बड़े टैक्स स्लैब, अधिक कटौती (डिडक्शन) और आसान फाइलिंग नियम शामिल हैं। इसका मुख्य लक्ष्य वेतनभोगी कर्मचारियों और परिवारों पर कर का बोझ कम करना है। बढ़ती लागतों के बीच, नागरिक अधिक 'टेक-होम सैलरी' और कम कंप्लायंस संबंधी परेशानियां चाहते हैं, जिससे खर्च और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।

2025 के बजट में, सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर जीरो टैक्स का प्रावधान करके उनकी इन आकांक्षाओं को काफी हद तक पूरा किया था। अब सभी की निगाहें फरवरी 2026 में आने वाले अगले बजट पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार भी मध्यम वर्ग को थोड़ी और राहत देगी और क्या न्यू टैक्स रिजीम के स्लैब को कुछ और उदार बनाया जा सकता है?
मिडिल क्लास की सबसे बड़ी मांग
मध्य वर्ग की सबसे बड़ी मांग 30% आयकर स्लैब की सीमा को 24 लाख से बढ़ाकर ₹40-50 लाख करना है। इस बदलाव से इस आय वर्ग के करदाताओं के लिए कर का भार कम होगा, जिससे उनकी शुद्ध आय (टेक-होम सैलरी) में वृद्धि होगी। इससे वेतनभोगी परिवार अपनी दैनिक जरूरतों और बचत के लिए अपनी आय का अधिक हिस्सा रख पाएंगे। यह बड़े स्लैब वास्तविक राहत प्रदान कर न्यायसंगत कराधान सुनिश्चित करेंगे।
उद्योग संगठन PHDCCI ने आयकर स्लैब का एक नया ढांचा प्रस्तावित किया है: ₹0-30 लाख तक की आय पर अधिकतम 20% टैक्स, ₹30-50 लाख पर 25% टैक्स, और ₹50 लाख से अधिक आय पर 30% टैक्स। यह बदलाव भारत के मध्य-आय वर्ग को महत्वपूर्ण राहत प्रदान कर सकता है।
टैक्सपेयर्स बुनियादी छूट सीमा बढ़ाने के साथ ही धारा 87A के तहत रिबेट सीमा में भी वृद्धि चाहते हैं। इन कदमों से खासकर वेतनभोगी लोगों की खर्च योग्य आय (डिस्पोजेबल इनकम) में तत्काल वृद्धि होगी।
मेडिकल खर्चों पर राहत की मांग
चिकित्सा खर्च वेतन वृद्धि से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए, करदाता स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के लिए धारा 80D के तहत कटौती की सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। यह कदम स्वयं, अभिभावकों और वरिष्ठ नागरिकों को बढ़ती मेडिकल महंगाई के खिलाफ अधिक कवरेज देगा। मौजूदा सीमाएं अक्सर अस्पताल के वास्तविक बिलों के मुकाबले कम पड़ जाती हैं। इन कटौतियों से बोझ कम होगा और बेहतर स्वास्थ्य कवरेज को प्रोत्साहन मिलेगा।
मध्य-वर्ग के परिवार आवास और चिकित्सा खर्चों में भी अधिक राहत की उम्मीद कर रहे हैं। वे होम लोन के ब्याज पर अधिक कटौती और चिकित्सा व्ययों के लिए अतिरिक्त छूट चाहते हैं। ये भारतीय परिवारों के सबसे बड़े 'आउट-ऑफ़-पॉकेट' खर्चों में से हैं, जिन्हें कम करना बेहद ज़रूरी है।
मध्य वर्ग एक आसान व पारदर्शी कर प्रणाली की उम्मीद कर रहा है। मुख्य अपेक्षाओं में एक आधुनिक, समेकित आयकर अधिनियम (IT बिल 2025), रीयल-टाइम रिफंड डैशबोर्ड और कम, स्पष्ट कटौतियां शामिल हैं। कंप्लायंस में आसानी अब टैक्स बचाना जितना ही ज़रूरी है।
ओल्ड टैक्स रिजीम होगा खत्म?
कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में देश सिंगल टैक्स व्यवस्था की तरफ बढ़ेगा। ऐसी संभावना हैकि नई टैक्स प्रणाली में टैक्स-फ्री इनकम का दायरा बढ़ने से पुरानी टैक्स रिजीम में बने रहने वाले लोग तेजी से कम होंगे। ऐसे में यह अटकलें तेज़ हैं कि सरकार अगले केंद्रीय बजट (Union Budget) में सिंगल टैक्स सिस्टम लागू करने की दिशा में कोई कदम उठा सकती है। हालांकि, यदि ऐसा होता है, तो पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) की कुछ अहम खूबियों को नए सिस्टम में भी शामिल करने की उम्मीद की जा सकती है।
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