
Budget 2023 : बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश कर दिया। बजट में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर या कैपेक्स) को काफी अधिक बढ़ावा दिए जाने की हैट्रिक के साथ ही टैक्स को कम करने और राजकोषीय घाटे (फिस्कल डेफिसिट) को कम करने पर जोर दिया गया। टैक्स छूट की सीमा 5 लाख रु से बढ़ा कर 7 लाख रु करके भाजपा नीत सरकार ने मिडिल क्लास को रिझाने की कोशिश की है। पर माना जा रहा है कि यह मुफ्तखोरी से भरा चुनावी बजट नहीं है। किसानों के लिए पीएम-किसान योजना के तहत आंवटन करीब-करीब बिना बदलाव के रहा और इसलिए नॉमिनल टर्म्स में इसमें कमी आई। बजट में चुनाव से पहले की होड़ नहीं देखने को मिली, जबकि बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 6.4% से घटाकर 5.9% कर दिया गया और अगले दो वर्षों के लिए प्रति वर्ष 0.7% की और गिरावट का अनुमान लगाता गया है।
ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू में बढ़ोतरी का अनुमान
सकल कर राजस्व (ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू) में 10.5 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है, जो कि बिल्कुल नॉमिनल जीडीपी के समान है। इसलिए यदि टैक्स में हालिया उछाल जारी रहती है तो वास्तविक राजस्व अधिक हो सकता है। पर इस बैलेंस्ड बजट ने शेयर बाजारों को खुश नहीं किया, मुख्य रूप से अडानी के शेयरों में लगातार गिरावट के कारण निफ्टी 0.26 फीसदी नीचे फिसला।
कितना बढ़ेगा कैपेक्स
रेलवे (48 फीसदी) और सड़कों (24.4 फीसदी) के साथ कैपेक्स में 33 फीसदी की भारी वृद्धि का अनुमान लगाया है। कुल इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में 10 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि होगी, जिसमें राज्यों को 1.3 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। बता दें कि बजट में फोकस 100 अहम प्रोजेक्ट्स पर होगा जिसमें 75,000 करोड़ रु से 'लास्ट-माइल' निवेश लंबी अवधि की परियोजनाओं को पूरा किया
ग्रीन ईकोनॉमी में बदलाव
ग्रीन ईकोनॉमी में ट्रांजिशन पर खर्च (क्लाइमेट लक्ष्यों के अनुरूप) 35,000 करोड़ रु होगा। प्रभावी कैपेक्स जीडीपी का 4.5 फीसदी होगा और इससे निवेश में तेजी लाने के लिए प्राइवेट निवेश में तेजी आ सकती है। एक दशक के हाई एनपीए के बाद बैंकों और कॉर्पोरेशंस दोनों की बैलेंस शीट में सुधार किया गया है, इसलिए बजट को प्राइवेट निवेश में तेजी लाने में मदद करनी चाहिए।
विनिवेश पड़ा हल्का
इस बार बजट में विनिवेश लक्ष्य हल्का रखा गया है। इस बार के बजट में विनिवेश लक्ष्य 51000 करोड़ रु है। ग्रामीण अप्रोच मनरेगा से दूर हुई है। नल के पानी के लिए जल जीवन मिशन (0.7 लाख करोड़ रु) और आवास के लिए पीएम आवास योजना (0.8 लाख करोड़ रु) का खर्च मनरेगा (0.6 लाख करोड़ रु) से अधिक है। बजट में कोविड फ्री-फूड प्रोग्राम के खात्मे, कम उर्वरक सब्सिडी और मनरेगा में कमी से वित्तीय गुंजाइश का लाभ उठाया गया है। इससे डायरेक्ट टैक्स में 37,000 करोड़ रु की कमी संभव हुई है।

ये रहे बाकी अहम पॉइंट्स
बजट को लेकर शेयर बाजार में उत्साह नहीं दिखा। इसका एक कारण यह भी है कि लंबी अवधि की राजकोषीय स्थिति अभी भी चिंताजनक है। 2025-26 का 4.5% का लक्ष्य भी फिस्कल लायबिलिटी और बजट मैनेजमेंट एक्ट में मूल 3 फीसदी लक्ष्य से कहीं अधिक है। कोविड खर्च ने राजकोषीय घाटे को काफी अधिक कर दिया और इसे कम करना अभी भी एक कठिन काम लगता है। इससे विदेशी निवेशकों ने 2022 में भारत से पैसा निकाला, इस तथ्य के बावजूद कि यह सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था रही। इस साल के संशोधित अनुमानों की तुलना में राजस्व व्यय (रेवेन्यू एक्सपेंडिचर) अगले वर्ष लगभग अपरिवर्तित रह सकता है। ब्याज भुगतान में 14% की वृद्धि होगी और मुद्रास्फीति कम से कम 4.5% होनी चाहिए।
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