नयी दिल्ली। अप्रैल में स्टॉक एक्सचेंज के खुलासे से पता चला था कि पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना (पीबीओसी) की प्रमुख भारतीय फाइनेंस कंपनी एचडीएफसी में 1 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी हो गई है। लेकिन चीनी केंद्रीय बैंक की कई अन्य लिस्टेड कंपनियों में भी हिस्सेदारी है। हालाँकि ये रडार से बाहर हैं क्योंकि 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी के कारण कंपनी को उसका खुलासा करने की जरूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए पीबीओसी के पास सीमेंट सेक्टर की प्रमुख अंबुजा सीमेंट की 0.32 फीसदी और पिरामल एंटरप्राइजेज की 0.43 फीसदी हिस्सेदारी है, जो फार्मा सेक्टर की कंपनी है। पीबीओसी की एचडीएफसी में हिस्सेदारी का मूल्य 3,100 करोड़ रुपये है, जबकि पिरामल एंटरप्राइजेज में इसकी हिस्सेदारी लगभग 137 करोड़ रुपये और अंबुजा सीमेंट में करीब 122 करोड़ रुपये की है।
2 साल पहले मिली थी मंजूरी
2 साल पहले पीबीओसी को आरबीआई से भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिली थी। मगर अब भारत में चीनी निवेश पर दो हालिया रिपोर्ट्स ने चेतावनी दी है कि कई फंड और निवेश कंपनियों, जो प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित या अप्रत्यक्ष रूप से चीनी सरकार से प्रभावित हैं, की उन भारतीय कंपनियों पर नजर है जो अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार बाजार सूत्रों के मुताबिक चीनी केंद्रीय बैंक की कई अन्य कंपनियों में भी हिस्सेदारी है, जिनमें एक जर्मन विनिर्माण प्रमुख और दूसरी घरेलू उर्वरक प्रमुख कंपनी हैं। लेकिन इनका सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है क्योंकि इनमें इसकी 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी है।
अंबुजा सीमेंट के 63 लाख शेयर हैं पीबीओसी के पास
2019 के लिए पेश की अंबुजा सीमेंट की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया था कि पीबीओसी के पास इसके लगभग 63 लाख शेयर हैं। इनमें से लगभग 16 लाख शेयर बैंक ने 2019 के दौरान छोटे-छोटे सौदों से हासिल किए थे। पिरामल एंटरप्राइजेज में पीबीओसी ने इस साल की शुरुआत में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 0.43 फीसदी कर ली। इसके लिए पीबीओसी ने इसके राइट्स इश्यू का सहारा लिया। 12 अप्रैल को एचडीएफसी में पीबीओसी की हिस्सेदारी सामने आने के बाद सरकार ने 17 अप्रैल को एक प्रेस नोट के माध्यम से भारत में विदेशी निवेश नियमों में संशोधन किया। नए नियमों के अनुसार जिस देश की सीमा भारत से लगती है उसकी कोई भी फर्म या निवेशक को याहं निवेश के लिए सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी। इससे पहले बांग्लादेश और पाकिस्तान पर निवेश के ऐसे प्रतिबंध लागू थे, मगर 17 अप्रैल के नोट में चीन को भी इसमें शामिल किया गया।
स्टार्ट-अप्स के जरिए घुसा चीन
विदेशी संबंध थिंक टैंक गेटवे हाउस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी कंपनियां भारत में स्टार्ट-अप्स के जरिए घुसी। उन्होंने स्टार्ट-अप्स के जरिए कई सेक्टरों क बड़ी कंपनियों में पैसा लगाया। चीनी कंपनियों की इस लिस्ट में अलीबाबा प्रमुख है, जिसने पेटीएम ग्रुप, ज़ोमैटो में निवेश किया। जबकि बाइजू, ओला, फ्लिपकार्ट में टेंसेंट ने पैसा लगाया। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार सालों में भारतीय स्टार्ट-अप्स में चीनी निवेश 12 गुना बढ़ा है। 2016 में 38.1 करोड़ डॉलर के मुकाबले ये 2019 तक 4.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इतना ही भारत में कुल चीनी निवेश 26 अरब डॉलर का था, जिसमें प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में 15 अरब डॉलर का निवेश और किया जाना था।
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