नयी दिल्ली। सऊदी अरब ने कच्चे तेल के निर्यात के लिए कीमतों में कम से कम दो दशकों में सबसे बड़ी वृद्धि की है। ओपेक (पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन) और रूस सहित इसके सहयोगी जुलाई के अंत तक कच्चे तेल के उत्पादन में रिकॉर्ड कटौती जारी रखने को तैयार हो गए हैं, जिसके बाद सऊदी अरब ने ये फैसला लिया है। सऊदी अरब के इस फैसले से एशिया को झटका लगेगा, जो सऊदी अरामको (सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी) का सबसे बड़ा क्षेत्रीय बाजार है। आइए जानते हैं कितने बढ़े हैं क्रूड ऑयल के दाम और इसका आप क्या पड़ सकता है असर।
अब तक की सबसे बड़ी बढ़त
सऊदी अरब ने जून के मुकाबले जुलाई निर्यात के लिए अरब लाइट क्रूड के दाम 0.20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ा कर 6.10 डॉलर प्रति बैरल कर दिए हैं। ब्लूमबर्ग की कैल्कुलेशन के मुताबिक सऊदी अरब द्वारा एशियाई ग्राहकों को बेचे जाने वाले अरब लाइट क्रूड में कीमत में महीने-दर-महीने आधार पर की गई ये सबसे बड़ी वृद्धि है। इससे भारत जैसे देशों का क्रूड ऑयल बिल बढ़ेगा, जो तेल के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं। सरकार महंगे क्रूड के मद्देनजर पेट्रोलियम उत्पादों यानी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती है।
सऊदी हर महीने बदलता है कीमत
सऊदी अरब अपने क्रूड को तेल बेंचमार्क के खास अंतर पर बेचता है। ये ग्लोबल रिफाइनर्स से चार्ज कर रहे प्रीमियम या डिस्काउंट में हर म हीने बदलाव करता है। आधिकारिक बिक्री मूल्य फिजिकल ऑयलम मार्केट में टोन सेट करने में मदद करता है, जहां असल बैरल में कारोबार होता है। इस बीच ग्लोबल तेल की कीमतों में अप्रैल में जितनी गिरावट आई थी वो लगभग पूरी हो चुकी है। सोमवार की सुबह ब्रेंट क्रूड, तेल की कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क, 43.41 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया, जो 6 मार्च के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। ओपेक, रूस और इनके सहयोगियों द्वारा उत्पादन में प्रति दिन 9.7 मिलियन बैरल की कटौती के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत अप्रैल की शुरुआत से लगभग दोगुनी हो गई है।
सऊदी अरब को होगा फायदा
ओपेक, रूस और बाकी तेल उत्पादक देशों ने जुलाई के अंत तक 10 फीसदी कम ग्लोबल सप्लाई बरकरार रखने पर सहमति जताई है। टाइट सप्लाई और तेल की कीमतों में वृद्धि से सऊदी अरब को कोरोना के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से उबरने में मदद मिलेगी। दरअसल दुनिया में तेल के प्रमुख उपभोक्ता देशों में लॉकडाउन की घोषणा से अप्रैल में तेल की कीमतें सिंगल डिजिट में पहुंच गई थीं। जबकि सऊदी अरब लगभग 60 प्रतिशत राजस्व अभी भी तेल से हासिल करता है और कम कीमतों के कारण इसकी अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है। सऊदी अरब के तेल निर्यात की वैल्यू पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में सालाना आधार पर 21.9 प्रतिशत गिर कर 40 अरब डॉलर रह गई थी। चीन 2020 के पहले 3 महीनों में सऊदी के निर्यात के लिए मुख्य देश रहा। इसके बाद जापान और फिर भारत का नंबर है।
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