नई दिल्ली, जनवरी 31। बजट से पहले आज संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश किया। सर्वेक्षण में अगले वित्त वर्ष 2022-23 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8-8.5 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया है। वहीं चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार बड़े स्तर पर वैक्सीन कवरेज, सप्लाई में सुधार और नियमों में ढील से लाभ, निर्यात में मजबूत वृद्धि और पूंजीगत खर्च को बढ़ाने जैसे फैक्टर्स से जीडीपी ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। जीडीपी ग्रोथ रेट के लिए यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि आगे कोरोना महामारी के कारण किसी भी तरह की आर्थिक दिक्कत (लॉकडाउन या प्रतिबंध) नहीं होगी। साथ ही मानसून सामान्य रहेगा, प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा वैश्विक लिक्विडिटी की निकासी मोटे तौर पर व्यवस्थित रहेगी, तेल की कीमतें 70-75 डॉलर की सीमा में होंगी और वैश्विक आपूर्ति सप्लाई चेन में दिक्कतें लगातार कम होंगी।
विभिन्न सेक्टरों की स्थिति
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण के तुरंत बाद लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 पेश किया। सर्वे में आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा अनुमानित 9.2 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ की तुलना में हैं। सर्वे में अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों की स्थिति के साथ-साथ विकास में तेजी लाने के लिए सुधारों की भी डिटेल दी गयी है।
कितनी बढ़ी खपत
इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि सरकारी खर्च के महत्वपूर्ण योगदान के साथ 2021-22 में कुल खपत में 7.0 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। पिछले छह वर्षों में भारत में स्टार्टअप ने बढ़िया ग्रोथ की है। नए मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2016-17 में केवल 733 से 2021-22 में बढ़कर 14,000 से अधिक हो गई है। इसके नतीजे में भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। इसके अलावा, रिकॉर्ड 44 भारतीय स्टार्टअप ने 2021 में यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया है, जिससे भारत में यूनिकॉर्न की कुल संख्या 83 हो गई है। इनमें से अधिकांश सेवा क्षेत्र में हैं।
अच्छी स्थिति में है भारतीय अर्थव्यवस्था
सर्वे के अनुसार कुल मिलाकर आर्थिक स्थिरता संकेतक बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2022-23 की चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार है। थोक महंगाई के 'ईंधन और बिजली' ग्रुप में मुद्रास्फीति 20 प्रतिशत से अधिक रही जो उच्च अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कीमतों को दर्शाती है। पहली लहर की तुलना में जीएसटी कलेक्शन पर कोविड-19 की दूसरी लहर का प्रभाव बहुत अधिक कम रहा।
रेवेन्यू रिसीट में बढ़ोतरी
सरकार के पास समर्थन बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर पूंजीगत व्यय बढ़ाने की वित्तीय क्षमता है। अप्रैल-नवंबर 2021 में रेवेन्यू रिसीट सालाना आधार पर 67 प्रतिशत अधिक रही। पूर्व-महामारी के स्तर को पार करते हुए सरकारी खपत में 7.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का अनुमान है। निजी खपत भी महामारी से पहले के स्तर के 97 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
एयर इंडिया का प्राइवेटाइजेशन
सर्वे में एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन का जिक्र किया गया। एयर इंडिया का निजीकरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। ये न केवल विनिवेश से प्राप्त होने वाली राशि के मामले में बल्कि निजीकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार के लिए कारगर रहा। चालू वर्ष में बजटीय राजकोषीय घाटा अधिक वास्तविक रहा, क्योंकि इसने कई ऑफ-बजट आइटमों को बजट आवंटन के भीतर लाने में मदद की।
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