नयी दिल्ली। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार पांचवे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस की। 12 मई को पीएम मोदी द्वारा 20 लाख करोड़ करोड़ रु के राहत पैकेज की घोषणा के बाद वित्त मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस का सिलसिला 13 मई से शुरू हो गया था। आज इस कड़ी की अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस रही। कल यानी चौथे दिन की तरह आज भी वित्त मंत्री ने आर्थिक से ज्यादा अलग-अलग सेक्टरों में रिफॉर्म्स पर फोकस किया, जिसमें एमएसएमई के लिए कई राहत भरे ऐलान किये गए। उन्होंने आज सात कदमों की घोषणा की। इनमें मनरेगा, स्वास्थ्य (शहरी एवं ग्रामीण) और शिक्षा संबंधी, बिजनेस एंड कोविड, कंपनी अधिनियम का डिक्रिमिनलाइजेशन, ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, पीएसयू कंपनियों संबंधित कदम, राज्य सरकारें और संबंधित रिसोर्सेज शामिल हैं। आइए जानते हैं एक नजर में वित्त मंत्री द्वारा आज किए गए बड़े ऐलान।
मनरेगा के लिए 40000 करोड़ रु
मनरेगा के तहत 40 हजार करोड़ रु आवंटित किए जाने का ऐलान किया गया। बता दें कि बजट 2020 में मनरेगा योजना के लिए 61000 करोड़ रु आवंटित किए गए थे। ये 40 हजार करोड़ रुपये इससे अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे। इससे काम के 300 करोड़ अधिक व्यक्ति दिन जनरटे होंगे और वे प्रवासी मजदूर जो अपने घरों को लौट रहे हैं उन्हें काम मिल सकेगा।
हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर
हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया जाएगा। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की संख्या बढ़ाई जाएगी। सभी जिलों में इन्फेक्शियस डिसीजेज हॉस्पिटल ब्लॉक बनेंगे। सभी जिलों और ब्लॉक लेवल पर इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और पब्लिक हेल्थ इकाइयां बनाई जाएंगी।
महामारी रोग अधिनियम में संशोधन
स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महामारी रोग अधिनियम में संशोधन किया गया।
ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा
स्कूली शिक्षा के लिए 3 चैनलों की पहचान की गई। शिक्षा के लिए 12 चैनलों को और जोड़ने की योजना है। स्काइप और डीटीएच नेटवर्क (जैसे TataSky, airtelindia) के माध्यम से स्कूली शिक्षा के लाइव इंटरैक्शन का प्रसारण भी प्रोसेस में है। एचआरडी मंत्रालय ने लाइव क्लास का इंतजाम किया। बच्चों की शिक्षा के लिए ऑनलाइन क्लास के लिए 12 नए चैनल शुरू होंगे। ई-पाठशाला में 200 नई किताबें शामिल की गई।
यूनिवर्सिटीज ऑनलाइन कोर्स शुरू करेंगी
टॉप 100 यूनिवर्सिटीज को 30 मई 2020 तक स्वचालित रूप से ऑनलाइन कोर्स शुरू करने की अनुमति होगी।
विदेशी बाजार में लिस्टिंग
ईज ऑफ डुइंग बिजनेस कार्यक्रम के तहत कंपनियों को उन विदेशी बाजारों में अपनी सिक्योरिटीज सीधे लिस्ट करने की इजाजत होगी, जिनके लिए अनुमति है। इसके अलावा वे कंपनियां जो स्टॉक एक्सचेंजों पर नॉन कंवर्टिबल डिबेंचर लिस्ट करती हैं उन्हें लिस्टेड कंपनी नहीं माना जाएगा।
पीएसयू (सरकारी) कंपनियों का निजीकरण
सरकार पीएसयू कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने में तेजी लाएगी। वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए एक नीति लाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक सुसंगत नीति की आवश्यकता है जिसमें निजी क्षेत्र को सभी क्षेत्रों में भाग लेने की अनुमति होगी जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।
कंपनी कानून के प्रावधानों को डीक्रिमिनिलाइज
कंपनी कानून में टेक्निलकल उल्लघंनों को गैर अपराधिक बनाया जाएगा। तकनीकी औऱ प्रक्रियात्मक चूक को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाएगा। कंपांउंडेबल ऑफेंसेज के तहत 18 सेक्शन की सीमा को बढ़ा कर 58 कर दिया गया है। साथ ही 7 कंपांउंडेबल ऑफेंसेज को पूरी तरह से हटा दिया गया है।
राज्यों को मदद
केंद्र के तनावपूर्ण संसाधनों के बावजूद अप्रैल और मई में राज्यों को 12,390 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान दिया गया। अप्रैल में 46,038 रुपये के करों पर राहत दी गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी राज्यों को करोना से लड़ने के लिए 4113 करोड़ रुपए की सहायता दी।
पीएम ईविद्या प्रोग्राम
PMeVidya कार्यक्रम एक मल्टी मोड डिजिटल ऑनलाइन लर्निंग शिक्षा मंच तुरंत शुरू किया जाएगा। इसमें DIKSHA, स्कूल शिक्षा के लिए #OneNationOnePlatform, सुविधा शामिल होगी। हर क्लास के लिए 1 टीवी चैनल होगा।
एमएसएमई को बड़ी राहत
इनसॉल्वेंसी कोड (आईबीसी) में ढील दी गई है। आईबीसी में राहत देने के पीछे सरकार का मकसद ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बेहतर बनाना है। कोरोना के लिहाज से एमएसएमई के खिलाफ ताजा इनसॉल्वेंसी कार्यवाही शुरू करने की अवधि को 6 महीने से बढ़ा कर 1 साल किया गया। एमएसएमई के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की न्यूनतम सीमा 1 लाख से बढ़ा कर 1 करोड़ कर दी गई। ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए कोरोना संबंधित लोन को आईबीसी के तहत डिफ़ॉल्ट श्रेणी से बाहर रखा जाएगा।
वित्त मंत्री की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस की अन्य बड़ी बातें :
- 8.19 करोड़ किसानों के खातों में 2000-2000 रु भेजे गए
- 20 करोड़ जनधन महिला खाताधारकों के खातों में 10 हजार करोड़ रु भेजे गए
- ये सब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर से संभव हुआ
- उजज्वला योजना के तहत 6.81 करोड़ लोगो को मुफ्त सिलेंडर दिए गए
- लॉकडाउन बढ़ाए जाने पर गरीबों को फ्री राशन दिया गया
- 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन दिया गया
- निर्माण मजदूरों को 50.35 करोड़ रु की मदद दी गई
- 12 लाख से अधिक ईपीएफओ सब्सक्राइबर को फायदा पहुंचाया
- किसानों को 86 करोड़ रु का कर्ज भी दिया गया।
- राज्यों को 4113 करोड़ रु की मदद दी गई
- टेस्टिंग और लैब के लिए 550 करोड़ रु
- जरूरी सेवाओं के लिए 3750 करोड़ रु दिए गए
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