नई दिल्ली, अक्टूबर 3। अक्टूबर महीने में निवेशक सोने के भाव पर ध्यान दे रहे हैं। भारत में सोने की कीमतों में अगस्त के बाद से ज्यादातर दिनों में गिरावट आई है। जुलाई में मासिक सोने की कीमत में 2.58 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि अगस्त में यह 2.11 फीसदी और सितंबर में फिर से 4.08 फीसदी गिर गई। सितंबर में सोना 4 फीसदी से अधिक सस्ता हुआ। ये सोने के रेट में मार्च 2021 के बाद से सबसे अधिक गिरावट है। मार्च में सोने की कीमतें इस साल के निचले स्तर पर थीं। कहा जा सकता है सोने के मौजूदा रेट खरीदारी और निवेश के लिए काफी सही है। मगर सोने की कीमतों में सितंबर की गिरावट अगर अक्टूबर में भी जारी रहती है तो यह सोने के व्यापारियों को चिंतित करेगी।
बढ़ना शुरू हुए सोने के रेट
30 सितंबर से सोने के बढ़ने शुरू हुए हैं। 30 सितंबर की शाम से स्थिति बदल गयी है। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें ऊपर जाने लगीं और फिर से 1755 डॉलर के आंकड़े को पार कर गईं। इस अचानक बदलाव के पीछे के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व अध्यक्ष जेरोम पॉवेल का देश के रोजगार मामले में नरम बयान रहा। इसके बाद 1 अक्टूबर को कॉमेक्स अक्टूबर फ्यूचर और हाजिर सोने की कीमतें 1755 डॉलर के दायरे से शुरू हुईं, जो सोने के ट्रेडर्स के लिए सकारात्मक संकेत है।
अक्टूबर में कहां तक जा सकते हैं रेट
यदि अक्टूबर में सोने के लिए स्थिति बेहतर रहती है, तो इसकी कीमत 1755 डॉलर से 1765 डॉलर या इससे अधिक के दायरे में रह सकती है। लेकिन अगर रेट फिर से गिरे हैं, तो अक्टूबर में सोना 1725 डॉलर से 1700 डॉलर तक आ सकता है। भारत में त्योहारी सीजन से पहले, सोने के व्यापारी और आईबीजेए सोने की कीमतों को मजबूत दायरे में देखना पसंद करेंगे। हालांकि सोने के रेट अमेरिकी आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगा, क्योंकि सोने पर डॉलर का काफी प्रभाव रहता है।
भारतीयों के लिए होगी अच्छी खबर
सोने की कीमतों में गिरावट आम भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर होगी, जो कम रेट पर सोना खरीद सकेंगे। भारत विदेशी बाजारों से सोना आयात करता है, इसलिए भारतीय सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय सोने के रेट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं। लेकिन अगर विदेशी बाजारों में कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो देश में त्योहारी सीजन से पहले भारतीय कीमतों में फिर से तेजी आएगी।
इन चीजों से तय होंगे दाम
पूरे अक्टूबर में सोने का भाव ज्यादातर 2 बातों पर निर्भर करेगा। इनमें महंगाई के लिए यूएस कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्पेंडीचर (पीसीई) इंडेक्स और अगस्त नॉन-फॉर्म पेरोल डेटा शामिल हैं, जिन्हें अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रकाशित किया जाएगा। रोजगार के आंकड़ों और अमेरिकी मुद्रास्फीति की कोई भी सकारात्मक खबर इस महीने सोने के रेट को और नीचे धकेल सकती है। मगर अच्छी संभावनाएं ये भी हैं कि कीमतों में तेजी आ सकती है।
इस सूरत में बढ़ेंगे रेट
अगर फेडरल रिजर्व, अमेरिका का केंद्रीय बैंक, ऊपर बताए गए डेटा से नाखुश रहता है और जल्द ही मौद्रिक नीति को सख्त नहीं करता है, तो सोने के रेट में तेजी जारी रहेगी।


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