अगर आप भी सोना खरीदने का शौख रखते है तो आप इस बात से बखूबी अवगत होंगे कि 2021 से सोने की हॉलमार्किंग अनिवार्य हो जाएगी। 2021 से पूरे देश में सोने के सिर्फ हॉलमार्क आभूषण ही बिकेंगे।
नई दिल्ली: अगर आप भी सोना खरीदने का शौख रखते है तो आप इस बात से बखूबी अवगत होंगे कि 2021 से सोने की हॉलमार्किंग अनिवार्य हो जाएगी। 2021 से पूरे देश में सोने के सिर्फ हॉलमार्क आभूषण ही बिकेंगे। हालांकि देश में लगभग तीन लाख ज्वेलर्स है जिनका ये दावा है कि सोने से बने उनके सभी आभूषण 22 कैरेट के होते हैं। लेकिन सौ फीसद शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है, जो कि काफी नरम होता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2000 में हॉलमार्क या प्रमाणित सोने की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए स्वैच्छिक हॉलमार्किंग स्कीम शुरू की थी।
हॉलमार्किंग के जरिए पता चलता सोने की शुद्धता
जानकारी दें आपको हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता जानने का एक तरीका होता। यह प्रक्रिया लेजर आधारित है। इससे यह पता चलता है कि सोने के किसी आभूषण में सोने की मात्रा कितनी है। इसके लिए ज्वेलर्स को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के यहां पंजीकृत कराना होता है। अभी बीआइएस द्वारा मान्यता प्राप्त 877 केंद्रों पर हॉलमार्किंग की जाती है। अभी देश में 40 फीसद सोने के आभूषण ही हॉलमार्क से साथ बिकते हैं। वहीं पूरे देश में सिर्फ 26,019 ज्वेलर्स ने ही बीआइएस के पास अपना पंजीकरण कराया है।
ग्राहकों से वसूली जा रही मनमानी कीमत
ज्यादातर आभूषणों की शुद्धता को लेकर सवाल बना हुआ है। एक सर्वे के मुताबिक 59 फीसद लोगों ने कहा कि ज्वेलर्स की बातों पर उन्हें कम भरोसा होता है। वहीं 48 फीसद ने कहा था कि सोने के गहने खरीदने में उन्हें ज्वेलर्स से धोखा मिला है। वैसे देश में सोने का मानक स्तर 14, 18 और 22 कैरेट निर्धारित किया गया है। ज्वेलर्स इतने ही कैरेट के सोने के बने गहने बेच सकते हैं। प्रत्येक के लिए कीमतें भी तय है, लेकिन देश में अभी एक से लेकर 22 कैरेट के सोने से बने आभूषण बिक रहे हैं। इस तरह ग्राहकों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है।
कई ज्वेलर्स ग्राहकों को बहकाने में सफल हो रहे हैं। मालूम हो कि 24 कैरेट सोने में सौ फीसद सोना होता है।
2021 से सारे आभूषणों की हॉलमार्किंग अनिवार्य
केंद्र सरकार ने ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए 2021 से सारे आभूषणों की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर रही है। इससे ग्राहकों को पता रहेगा कि उनका सोना कितना शुद्ध है और वे उसी के अनुसार कीमत भी चुकाएंगे। इस स्कीम के लागू होने के बाद इन आभूषणों पर चार तरह के चिन्ह होंगे- बीआइएस का लोगो, कैरेट सहित सोने की शुद्धता बताने वाली तीन अंकों की संख्या, ज्वेलर की यूनिक आइडी, हॉलमार्क करने वाले केंद्र की आइडी।
एक साल की हो सकती जेल
बता दें कि केंद्र सरकार का कहना है कि इसमें एक साल का वक्त इसीलिए लिया गया है, ताकि ज्वेलर्स अपने सभी स्टॉक को हॉलमार्क करवा लें और इस दौरान ज्यादा से ज्यादा हॉलमार्क करने वाले सेंटर भी खोले जा सकें। जो भी ज्वेलर इस फैसले को नहीं मानेगा उस पर कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है और एक साल की जेल भी हो सकती है
फिलहाल 234 जिलों में ही हॉलमार्किंग केंद्र
इस नियम के लागू होने का मतलब है कि सभी ज्वेलर्स को बीआइएस के पास अपना पंजीकरण कराना होगा और सोने के सिर्फ हॉलमार्क आभूषण ही बेच सकेंगे। इससे आभूषण सेक्टर को संगठित करने में मदद मिलेगी, लेकिन अभी देश के कुछ बड़े शहरों में ही हॉलमार्क सेंटर हैं। ऐसे में छोटे शहरों के ज्वेलर्स के लिए अपने आभूषण की हॉलमार्किंग करने में समस्या आएगी। अभी देश में लगभग 700 जिले हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 234 जिलों में ही हॉलमार्किंग केंद्र हैं।
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