GPF Contribution Limit : पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खाते में वार्षिक योगदान की सीमा तय है। पीपीएफ में आप एक साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं। वहीं इसी से मिलती-जुलती एक स्कीम है जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ)। अब इस योजना पर भी अधिकतम वार्षिक निवेश राशि पर एक लिमिट होगी। जीपीएफ का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारी करते हैं और केवल वे ही इसमें निवेश कर सकते हैं। वे पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत लाभ पाने के हकदार होते हैं, ताकि वे अपने रिटायरमेंट फंड को तैयार कर सकें। आगे जानिए कितनी है नयी लिमिट।

इतनी है लिमिट
एक वित्तीय वर्ष में जीपीएफ सब्सक्रिप्शन पर 5 लाख रुपये से अधिक के ब्याज को पहले सरकार ने टैक्सेबल बनाया था। सरकार ने अब कर्मचारियों को चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2022-23) से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में 5 लाख रुपये से अधिक जमा करने पर रोक लगा दी है। यानी अब सरकारी कर्मचारी चालू वित्त वर्ष से किसी भी वित्त वर्ष में जीपीएफ में अधिकतम 5 लाख रु का ही निवेश कर सकते हैं।
5 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकता योगदान
पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) की तरफ से एक ऑफिस मेमोरेंडम (ओएम) नंबर 3/6/2021-पी एंड पीडब्लू (एफ) दिनांक 11/10/2022 के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 के लिए मासिक जीपीएफ सदस्यता का योग (पूरे साल में कुल) 5 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकता। इसलिए, यदि किसी सरकारी कर्मचारी की कुल जमा राशि अक्टूबर 2022 तक 5 लाख रुपये से अधिक हो गई है, तो वेतन से उसके जीपीएफ सब्सक्रिप्शन की कटौती रोक दी जाएगी।

अगले साल फिर आएगा नया नियम
ओएम के अनुसार, अगले वित्तीय वर्ष (यानी वित्त वर्ष 2023-24) के लिए मासिक सब्सक्रिप्शन को नियम 8(i) उप-खंड (बी) के अनुसार इस तरह से तैयार किया जाएगा कि जमा राशि का योग 5 लाख रुपये की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। हालाँकि, अक्टूबर 2022 तक किए गए 5 लाख रुपये से अधिक के अतिरिक्त सब्सक्रिप्शन के एडजस्टमेंट का तरीका क्या होगा ये स्पष्ट नहीं है। यानी क्या अतिरिक्त राशि वापस की जाएगी या वित्त वर्ष 2023-24 की राशि के साथ एडजस्ट किया जाएगा।
जानिए जीपीएफ की पूरी डिटेल
जैसा कि हमने बताया कि जीपीएफ केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है। सरकारी कर्मचारी अपनी सैलरी का एक तय हिस्सा योगदान के रूप में इसमें जमा करते हैं। इस फंड में जमा पैसा भी रिटायरमेंट के समय मिलता है। जमा पैसे पर ब्याज भी मिलेगा। जीपीएफ पर सरकार की तरफ से ब्याज दर 7.1 फीसदी ऑफर की जा रही है। ध्यान रहे कि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी जीपीएफ के पात्र नहीं होते।

वीपीएफ भी है काम का
वीपीएफ ईपीएफ का ही हिस्सा है। यदि कोई कर्मचारी अपने वेतन में से जरूरी 12 फीसदी से अधिक योगदान ईपीएफ में करना चाहता है तो उसे वीपीएफ का सहारा लेना होगा। इस पर ब्याज दर ईपीएफ वाली ही होती है। हाल ही में ईपीएफओ ने ईपीएफ पर ब्याज दर 8.5 फीसदी से घटा कर 8.1 फीसदी कर दी है। लिहाजा वीपीएफ पर भी इतनी ही ब्याज दर होगी।
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