देशभर में लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं। हालांकि, लॉकडाउन में चौथे चरण में इसमें आंशिक छूट मिली है।
नई दिल्ली: देशभर में लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं। हालांकि, लॉकडाउन में चौथे चरण में इसमें आंशिक छूट मिली है। लेकिन, जीएसटी कलेक्शन पर इसका असर देखने को मिल रहा है। कोरोनावायरस के कारण देशभर में 25 मार्च से लागू लॉकडाउन की वजह से लगभग हर तरह के बिजनेस प्रभावित हुए हैं। लिहाजा, जीएसटी कलेक्शन पर भी इसका असर पड़ा है। इस साल अप्रैल माह में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के संग्रह में गिरावट आई है। सीजीए द्वारा जारी आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में 70 फीसदी तक की कमी आई है।

बता दें कि अप्रैल 2020 के लिए जारी इस डाटा में पता चलता है कि इस महीने के दौरान जीएसटी कलेक्शन में केंद्र की हिस्सेदारी 16,707 करोड़ रुपये थी, जो पिछले वर्ष के 55,329 करोड़ रुपये की तुलना में 70 फीसदी तक कम थी। आमतौर पर सरकार द्वारा घोषित जीएसटी में केंद्र और राज्यों दोनों का संग्रह होता है। हालांकि सीजीए के डाटा में केवल जीएसटी कलेक्शन के लिए केंद्र की हिस्सेदारी दिखी। इससे पहले अप्रैल 2019 में जीएसटी कलेक्शन में केंद्र और राज्यों दोनों की हिस्सेदारी मिलाकर 113,865 करोड़ रुपये थी।
वहीं अप्रैल, 2020 के लिए केंद्र की जीएसटी संख्या (16,707 करोड़ रुपये) का आकलन करें तो, कुल जीएसटी कलेक्शन (केंद्र और राज्य) लगभग 34,300 करोड़ रुपये हो सकता है। इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि अप्रैल 2020 में जीएसटी कलेक्शन में इतनी बड़ी गिरावट कोरोना वायरस महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन के कारण हो सकती है। हालांकि ये ध्यान दिया जाना चाहिए कि अप्रैल का जीएसटी कलेक्शन मार्च के लेनदेन पर आधारित है और लॉकडाउन 25 मार्च से शुरू हुआ था। इसलिए अप्रैल में कलेक्शन में गिरावट रिटर्न फाइलिंग की तारीखों के विस्तार के कारण हो सकती है।
24 मार्च को सरकार ने कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए करदाताओं पर बोझ कम करने के लिए कई घोषणाएं की थीं। इन घोषणाओं में कहा गया था कि जिन कंपनियों का टर्नओवर पांच करोड़ रुपये से कम है, उन्हें जीएसटी देर से दाखिल करने पर भी कोई विलंब शुल्क नहीं देना होगा। इसके साथ ही ना ही इनपर कोई जुर्माना लगेगा। वहीं जिनका टर्नओवर पांच करोड़ या उससे अधिक है, वह जून के आखिरी हफ्ते तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं। हालांकि 9 फीसदी की ब्याद दर का भुगतान करना होगा।
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