Oil Import Bill: एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 के दौरान भारत द्वारा इंपोर्ट किए गए क्रूड ऑयल के इंपोर्ट बिल में 16 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। एक्सपर्ट का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय रेट्स में ज्यादा उछालना आने की वजह से पिछले फाइनेंशियल ईयर के दौरान भारत को यह फायदा हुआ है। हालांकि इंडिया में क्रूड ऑयल के डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है और यह इसके लिए दूसरे देशों पर काफी ज्यादा निर्भर हो चुका है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर भारत की क्रूड ऑयल के लिए निर्भरता काफी ज्यादा बढ़ गई है और अपने नए लेवल पर पहुंच गई है।

हालांकि पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल के आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 में 23.25 करोड़ टन क्रूड ऑयल इंडिया में इंपोर्ट किया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2023 में भी भारत के द्वारा इंपोर्ट किए गए क्रूड ऑयल की क्वांटिटी इतनी ही थी।
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2023 के फाइनेंशियल ईयर में 23.5 करोड़ टन क्रूड ऑयल की कीमत 157.5 अरब डालर थी। लेकिन साल 2024 के फाइनेंशियल ईयर में इसमें जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2024 में भारत ने 2.5 करोड़ टन कच्चा तेल इंपोर्ट करने के लिए सरकार के द्वारा मात्र 132.4 अरब डॉलर का भुगतान ही किया गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया के सबसे बड़े ऑयल इंपोर्टर में भारत का स्थान तीसरे नंबर पर है। मिनिस्ट्री द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि घरेलू उत्पादन में गिरावट के चलते क्रूड ऑयल के लिए भारत की निर्भरता दूसरे देशों पर काफी ज्यादा बढ़ गई है। यही कारण है कि अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए भारत को ज्यादा मात्रा में क्रूड ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड ऑयल के लिए भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता 27.7 परसेंट तक पहुंच गई है। हालांकि 1 साल पहले तक भारत विदेश से सिर्फ अपनी जरूरत का 87.4 प्रतिशत क्रूड ऑयल ही इंपोर्ट कर रहा था। इन आंकड़ों से साफ पता चलता है की आंकड़ों से साफ पता चलता है कि पिछले 1 साल के अंदर, दूसरे देशों पर भारत के क्रूड ऑयल निर्भरता 0.3 परसेंट तक बढ़ी है।
फाइनेंशियल ईयर 2024 में घरेलू स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन 2.94 करोड़ टन रहा था। वही साल 2023 के फाइनेंशियल ईयर के दौरान भी भारत का डोमेस्टिक क्रूड ऑयल प्रोडक्शन लगभग इतना ही था।
सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं बल्कि भारत ने दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट को भी इंपोर्ट किया है जिम एलपीजी भी शामिल है।
जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ने लिक्विड पेट्रोलियम गैस और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का 4.81 करोड़ टन तक इंपेर्ट किया है। इसके लिए आप 23.4 अरब डॉलर तक खर्च किया जा चुका है। भारत ने 47.4 अरब डॉलर कीमत के 6.22 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया। गौरतलब है कि आगे आने वाले समय में भारत की पेट्रोलियम की निर्भरता बढ़ने वाली है।
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