भारत, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा. साल 2030 तक इकोनॉमी का आकार अमेरिका और चीन के बाद तीसरे सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में होगा. ग्लोबल रेगिंट एजेंसी एसएंडपी ने अपने ताजा रिपोर्ट 'लुक फॉरवर्ड: इमर्जिंग मार्केट्स-ए डिसीसिव डिकेड' में इसका जिक्र किया है. इसके मुताबिक अगले 3 साल में भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार तेज रहने वाली है. लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं. क्योंकि इससे बेसिक सर्विस कवरेज और बढ़ते निवेश के लिहाज उत्पादता की जरूरत होगी.
अगले 3 साल तेज रही ग्रोथ की रफ्तार
जैसे-जैसे दुनिया अगले दशक में आगे बढ़ रही है, उभरते बाजार वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के के मुताबिक अगले तीन सालों में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे तेज़ ग्रोथ देखने को मिलेगी. यह फिलहाल पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में है.
2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर का है टारगेट
भारत ने 2047 तक अपनी मौजूदा 3.6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का टारगेट रखा है. यह जेपी मॉर्गन के सरकारी उभरते बाजार बॉन्ड इंडेक्स में भारत की योजनाबद्ध 2024 में एंट्री को देखते हुए रखा गया. इसका उद्देश्य घरेलू कैपिटल मार्केट रिसोर्सेज को अनलॉक करना है और अतिरिक्त सरकारी फंडिंग को मुहैया कराना है.
आने वाले सालों में बढ़ेगा इमर्जिंग इकोनॉमी का महत्व
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने हालिया रिपोर्ट में ग्लोबल इकोनॉमी में इमर्जिंग मार्केट के अहम योगदान पर फोकस किया है. इन बाजारों में 2035 तक औसतन 4.06% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है, जोकि डेवलप्ड इकोनॉमी के लिए पूर्वानुमानित 1.59% ग्रोथ से कहीं ज्यादा है. 2035 तक, इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ का लगभग 65% हिस्सा होने का अनुमान है, जिसमें चीन, भारत, वियतनाम और फिलीपींस जैसी एशिया-पेसिफिक इकोनॉमी का बहुत बड़ा हिस्सा हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आएगे. वहीं, इंडोनेशिया और ब्राजील भी बढ़ेंगे, जोकि क्रमशः आठवें और नौवें स्थान पर पहुँचेंगे.
भारत का आर्थिक नजरिया और चुनौतियाँ
आर्थिक समृद्धि की ओर भारत का सफर फिस्कल डेफिसिट में लचीलेपन को बढ़ाना और कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ावा देने के रणनीतिक उपायों द्वारा समर्थित है. यह लॉन्ग टर्म ग्रोथ को सपोर्ट करने और ऊंचे आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काफी अहम हैं. अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, खास तौर पर इसकी तेजी से बढ़ती आबादी के मामले में हैं. 2035 तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने की उम्मीद के साथ, भारत को बुनियादी सेवाओं की बढ़ती मांगों और उत्पादकता बनाए रखने के लिए पर्याप्त निवेश की आवश्यकता से जूझना होगा.
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