Oil Exploration : मंगलवार को तेल नियामक हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय ने यह जानकारी दी कि भारत तेल एवं गैस का पता लगाने और उत्पादन के लिए ताजा अपतटीय बोली चरण के वृहद स्तर पर 26 ब्लॉक या क्षेत्रों की पेशकश की हैं। साथ ही 16 क्षेत्रों को भी कोल-बेड मीथेन (सीबीएम) के पूर्वेक्षण के लिए एक अलग दौर में पेश किया जा रहा हैं। हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) की तरफ से बोली की समय सीमा को बताएं बिना उनके तरफ से कहा गया कि, सरकार की तरफ से अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए अन्वेषण और विकास के लिए करीब 2.23 लाख वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करने वाले 26 ब्लॉकों की पेशकश की ऐलान करती हैं। ये जो 26 ब्लॉक हैं उनमें से 15 क्षेत्र जो हैं। बहुत ही गहरे पानी में हैं, उनमें से 8 क्षेत्र उथले समुद्र में हैं और 3 ब्लॉक जो हैं वो ऑनलैंड में हैं।
वर्ष 2016 को नीतियों के तहत बोली का दौर शुरू किया गया था
बोली का जो दौर हैं उसको वर्ष 2016 को नीतियों के तहत शुरू किया जा रहा हैं, इसको हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी यानी हेल्प कहा जाता हैं। इसे प्रख्यापित 30 मार्च, 2016 को किया गया था। तब से बोली के दौर की बात करें तो 7 बार यानी ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (ओएएलपी) के सात बोली दौर संपन्न हुए हैं और अन्वेषण और उत्पादन ब्लॉक 134 प्रदान किए गए हैं। ये जो ब्लॉक हैं। 19 तलछटी घाटियों के 2,07,691 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं।
जुलाई के समय 8वां दौर शुरू किया गया था
8वां दौर जब जुलाई के समय शुरू किया गया। जिसमें 10 क्षेत्रों की पेशकश की गई थी। उस दौर में जो विजेता थे। उनका ऐलान अभी तक नहीं किया गया हैं। राउंड- 8 ब्लॉक के सफल अवार्ड हैं। उससे 36,316 वर्ग किमी का अन्वेषण क्षेत्र जुड़ जाएगा और ओएएलपी के शासन हैं। इसके तहत संचई अन्वेषण रकबा हैं। उसको 2,44,007 वर्ग किमी तक बढ़ाया जाएगा।
नवीनतम दौर को अपतटीय बोली दौर को ओएएलपी बोली दौर–9 नाम दिया हैं
डीजीएच एचआईएलपी के तहत नवीनतम दौर को अपतटीय बोली दौर को ओएएलपी बोली दौर-9 नाम दिया हैं। ओएएलपी-9 में अन्वेषण के लिए प्रस्तावित किया जा रहा हैं। वो क्षेत्र पिछले 8 राउंड में एक साथ रखें गए जो क्षेत्र हैं करीब बराबर हैं। डीजीएच की तरफ से कहा गया हैं कि जो विशेष बोली दौर में 16 सीबीएम पेश किए जा रहे हैं। उनमें मध्यप्रदेश (चार), छत्तीसगढ़, तेलंगाना(तीन प्रत्येक), महाराष्ट्र, ओडिशा (2 प्रत्येक), पश्चिम बंगाल(1-1) और झारखंड में फैले हुए हैं। जो ओएएलपी हैं उसकी तरह ही, सीएबएम ब्लॉकों को राजस्व हिस्सेदारी के आधार पर पेश किया जा रहा हैं। सबसे अधिक पेशकश जो कंपनी सरकार को करेगी। ब्लॉक उसे मिलेगा। इस नियम के जो अपवाद हैं। वो ऐसे ब्लॉक हैं। जो बेहद कम संभावना वाले बेसिन में स्थित हैं।
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