New Manufacturing Sectors: भारत केमिकल्स, शिपिंग कंटेनर और वैक्सीन इनपुट सहित 6 नए सेक्टरों में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए करीब 18 हजार करोड़ रु तक के प्रोत्साहन की पेशकश करने की योजना बना रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह जानकारी दो सरकारी अधिकारियों द्वारा दी गई है। यह प्रस्ताव वर्ष 2020 में शुरू की गई देश की 1 लाख 97 हजार करोड़ रु की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का हिस्सा है, जो मौजूदा समय में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से लेकर ड्रोन तक 14 सेक्टर्स को लक्षित करती है, लेकिन उनमें से केवल कुछ ही क्षेत्रों में सफल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कीम में जानकारी रखने वाले दो सरकारी अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि स्कीम के तहत लिमिटेड पेमेंट से "बड़ी" बचत हो सकती है जिसे नए सेक्टर में पुनर्निर्देशित किया जा सकता है।
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि जो 6 सेक्टर पीएलआई स्कीम में शामिल हो सकते है। उनमें साइकिल, चमड़ा, खिलौने और जूते भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सेक्टर करीब 18 हजार करोड़ रु के आवंटन को साझा करेंगे जो योजना के मूल परिव्यय से निकाला जा रहा है। पीएलआई स्कीम को देश व्यापक भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बेहद जरूरी मानता है।
मार्च में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में करीब 2 हजार 900 करोड़ रु के कुल प्रोत्साहन का भुगतान किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष इस्पात उत्पादों, सौर मॉड्यूल और कार घटकों सहित क्षेत्रों में कारोबार को काफी कम भुगतान किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के आंतरिक विश्लेषण का हवाला देते हुए, दो अधिकारियों में से एक की तरफ से कहा गया है कि अप्रैल में शुरू होने वाले फाइनेंशियल ईयर में संवितरण करीब 110 अरब रु और फाइनेंशियल ईयर 2024/25 तक 40 हजार करोड़ रु तक बढ़ सकता है।


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