नयी दिल्ली। चीन के साथ हुए सीमा विवाद को लेकर भारत कारोबारी मोर्चे पर सख्त होता जा रहा है। भारत का उद्देश्य चीन पर अपनी निर्भरता कम करना है। इसीलिए सरकार अब एक नई योजना बना रही है। दरअसल डीपीआईआईटी (डिपार्टमेंट ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड) ने ट्रेड एसोसिएशंस से चीन से खरीदे जाने वाले सामानों की लिस्ट मांगी है ताकि सरकार उनमें से गैर-जरूरी सामानों की पहचान करके उनकी जगह स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे सके। दोनों देशों के बीच सीमा संघर्ष के मद्देनजर भारत सरकार चीन पर निर्भरता कम करने के उपायों पर ध्यान दे रही है।
टेलीकॉम और रेलवे सेक्टर में उठाए कदम
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार खिलौने, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, फर्नीचर, सहित आयातित चीनी वस्तुओं की सूची डीपीआईआईटी, जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है, को 22 जन तक दी सौंपी जानी है। इससे पहले दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल को किसी भी चीनी उपकरण का उपयोग न करने को कहा था, जबकि पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में चीनी कंपनी चाइना रेलवे सिग्नल एंड कम्युनिकेशन (सीआरएससी) कॉर्प के कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करने का भी फैसला लिया गया। चीनी कंपनी को मिले करीब 500 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट में उत्तर प्रदेश में न्यू भूपुर-मुगलसराय खंड में 413 किलोमीटर की दो लाइनों के लिए डिजाइनिंग, आपूर्ति, निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग सिग्नलिंग, दूरसंचार और संबंधित काम शामिल हैं।
चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग तेज
लद्दाख बॉर्डर पर चीन-भारत तनाव को देखते हुए सीएआईटी (कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) ने कहा है कि "चीन का रवैया देश (भारत) के हितों के खिलाफ है। इसलिए इसने मेड इन चाइना प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। इसके लिए सीएआईटी ने 500 से अधिक चीनी उत्पादों की लिस्ट भी जारी की है। इस लिस्ट में खिलौने, कपड़े, वस्त्र, परिधान, रसोई के सामान, फर्नीचर, हार्डवेयर, जूते, हैंडबैग, लगेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉस्मैटिक्स और गिफ्ट आइटम, घड़ियां, रत्न और आभूषण, स्टेशनरी, कागज, स्वास्थ्य उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।
कौन होगा ज्यादा प्रभावित
भारत की तरफ से कारोबार के मामले में कई कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट बताते हैं कि दोनों देशों के बीच कारोबार रोकने से भारत को अधिक नुकसान होगा, जबकि इससे चीन पर काफी कम असर पड़ेगा। वास्तव में चीन भारत के निर्यात में 5 फीसदी और भारत के आयात में 14 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। जबकि भारत चीन के कुल निर्यात में सिर्फ 3 फीसदी और आयात में 1 फीसदी से भी कम योगदान रखता है। यानी अगर दोनों देशों के बीच कारोबार रोका जाए तो चीन अपने निर्यात का केवल 3 फीसदी और अपने आयात का 1 फीसदी खोएगा, जबकि भारत को अपने निर्यात का 5 फीसदी और आयात का 14 फीसदी नुकसान होगा।
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